पिछले चुनाव में भाजपा ने 7, सपा ने 2 और शिक्षक दल ने जीती थीं 2 सीटें
आचार संहिता उल्लंघन और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप
यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शुक्रवार को होगा मतदान
UP Legislative Council Poll: यूपी में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे। इन 6 सीटों में पांच सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हैं और 6 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की है। इन सीटों पर सामान्य मतदाता वोट नहीं डालता बल्कि पंजीकृत स्नातक और पंजीकृत शिक्षक ही अपने-अपने क्षेत्र में वोट डाल सकते हैं। पिछली बार इनमें से 7 सीट भाजपा ने जीती थीं, सपा के पास सिर्फ दो ही सीट थीं। दो सीटें शिक्षक दल के पास थीं।
राज्य में विधानसभा चुनाव जल्द हो रहे हैं इसलिए विधान परिषद के इस चुनाव ने तमाम राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस बार मुकाबले में शिक्षक का लगभग खत्म हो चुका है इसलिए सारी लड़ाई समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। बीजेपी ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ सहित भाजपा के तमाम बड़े नेता और मंत्रियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी तो समाजवादी पार्टी किसी भी सूरत में पिछली बार से अधिक सीट लाने के लिए की जान से जुटी थी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे चुनाव में गड़बड़ी करने की कोशिश ना करें अन्यथा उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
स्नातक सीटों में आगरा, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी, लखनऊ और वाराणसी की सीट शामिल हैं जबकि शिक्षक क्षेत्र में आगरा, मेरठ ,बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, काशी और गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र की सीटें शामिल हैं। अगर क्षेत्र की बात करें तो इनमें से 5 सीटें पश्चिमी यूपी, 3 पूर्वी यूपी, 2 लखनऊ और एक सीट बुंदेलखंड में पड़ती है।
मुख्यमंत्री के क्षेत्र गोरखपुर-फैजाबाद में शिक्षक सीट पर भाजपा ने ध्रुव कुमार त्रिपाठी को और समाजवादी पार्टी ने संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारा है जो बीजेपी से बागी होकर लड़ रहे हैं। ध्रुव कुमार त्रिपाठी 2008 से शिक्षक दल से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। यहां बीजेपी को भीतरघात का भी सामना करना पड़ रहा है।
आगरा शिक्षक सीट पर भी मुकाबला रोचक है। पिछली बार आकाश अग्रवाल वहां शिक्षक दल से जीते थे, इस बार वे सपा उम्मीदवार हैं। स्नातक सीट बीजेपी ने जीती थी। इस बार उसने पिछले एमएलसी मानवेंद्र सिंह को ही मैदान में उतारा है जबकि उन्हें समाजवादी पार्टी के शशांक सिंह बड़ी चुनौती दे रहे हैं।
वाराणसी खंड की दोनों एमएलसी सीटों पर समाजवादी पार्टी अपना कब्जा बरकरार रखने की पूरी कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र होने के कारण बीजेपी ने भी इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है और समाजवादी पार्टी को बेदखल करने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहां पूरा जोर लगाया है, जबकि सपा डोर टु डोर प्रचार में जुटी हुई थी।
राजधानी लखनऊ की स्नातक सीट में मुकाबला भाजपा के मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह और सपा की पूर्व एमएलसी कांति सिंह के बीच है। दोनों ही हरदोई से ताल्लुक रखते हैं। इस सीट के चुनाव नतीजे भाजपा के चुनाव प्रबंधन और समाजवादी पार्टी के जमीनी प्रचार की भी परीक्षा माने जा रहे हैं।
मतदान से पहले के अंतिम जोड़-तोड़ में बीजेपी पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन, मतदाताओं को डराने धमकाने और प्रत्याशियों को लालच देने आरोप भी खूब लगाए जा रहे हैं। इस बार शिक्षक दल के मुख्य मुकाबले से लगभग बाहर हो जाने के कारण बीजेपी और सपा दोनों के पास ही अपनी-अपनी सीट बढ़ाने का अवसर है। हालांकि कुछ निर्दलीय इस गणित में सेंध भी मार सकते हैं।
बीजेपी के पास गठबंधन सहयोगियों को मिलाकर विधान परिषद में 80 से ज्यादा विधायक हैं और वहां उसके बहुमत को इन चुनाव नतीजों से किसी भी तरह की चुनौती नहीं मिलने जा रही। लेकिन अगले विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल की तरह देखे जा रहे। इस विधान परिषद चुनाव नतीजों पर राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं की नजर इसलिए टिकी है कि इनके आधार पर मतदाताओं के मूड का अंदाज तो लगाया ही जा सकेगा।
इस चुनाव में मतदान करने वाले पात्र कर्मचारियों को विशेष आकस्मिक अवकाश की घोषणा की गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी विशाख जी ने निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के तहत लखनऊ जिले में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को मतदान में भाग लेने के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश की सुविधा मिलेगी।