पुलिस गिरफ्त में आरोपी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

लखनऊ में 100 करोड़ी शिक्षा माफिया गिरफ्तार, डॉक्टर बनाने के नाम पर करता था ठगी...कांड कर देंगे हैरान

UP Crime News: लखनऊ पुलिस ने 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये NEET में कम रैंक वाले छात्रों को निशाना बनाते थे और मैनेजमेंट कोटे से दाखिले का झूठा भरोसा दिलाते थे।

अभिषेक सिंह

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई के लिए नीट (NEET) परीक्षा पास कराने और नामी कॉलेजों में दाखिला दिलाने का झांसा देकर 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले दो बड़े जालसाजों को गिरफ्तार किया है।

डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि ये दोनों युवक लखनऊ समेत कई राज्यों के छात्रों को अपना शिकार बना चुके थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान औरंगाबाद, बिहार निवासी प्रेम प्रकाश विद्यार्थी (35) उर्फ अभिनव शर्मा और समस्तीपुर, बिहार निवासी संतोष कुमार (34) के रूप में हुई है। इन आरोपियों के खिलाफ नई दिल्ली, गौतमबुद्धनगर, बिहार, सहारनपुर, प्रयागराज और लखनऊ के साइबर क्राइम और विभूतिखंड थाने में कुल 18 मुकदमे दर्ज हैं।

14 साल से जारी था ठगी का खुला 'खेल'

मुख्य आरोपी प्रेम प्रकाश विद्यार्थी मैकेनिकल इंजीनियर (बीटेक पास) है। उसने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई (मथुरा के जीएलए कॉलेज से बीटेक) के दौरान ही वर्ष 2011 से मेडिकल संस्थानों में एडमिशन के नाम पर अभिभावकों को ठगना शुरू कर दिया था। पुलिस के दावे के अनुसार, आरोपित अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। दूसरे आरोपी संतोष की शिक्षा को लेकर स्रोतों में विरोधाभास है; एक स्रोत उसे 12वीं पास बताता है, जबकि दूसरे के अनुसार वह कक्षा 6 तक ही पढ़ा है। संतोष को प्रेम प्रकाश 30 हजार रुपये प्रति माह सैलरी देता था।

अपनाता था ठगी करने का शातिर तरीका

जालसाज उन स्टूडेंट्स को निशाना बनाते थे, जिनकी नीट परीक्षा में मेरिट कम होती थी और उन्हें काउंसिलिंग से अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पाता था। इसके लिए दोनों युवक प्राइवेट साइबर कंपनियों से स्टूडेंट्स का डेटा खरीद लेते थे। इसके बाद ये फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर अपनी 'स्टडी पाथवे कंसलटेंसी' का प्रचार (एडवरटाईज) करते थे। अभिभावकों को कंसल्टेंसी ऑफिस बुलाकर उन्हें बाराबंकी के हिंद मेडिकल कॉलेज और सीतापुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे की सीट की एडवांस बुकिंग कराने का झांसा दिया जाता था। प्रेम प्रकाश विद्यार्थी ने 'हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस' के नाम से अलग-अलग बैंकों में चालू खाते (करंट अकाउंट) खुलवा रखे थे। वह ठगी की रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाता था, और बाद में इन्हें अपने निजी खाते में डाल लेता था।

डेटिंग ऐप से हायर करता था टेलीकॉलर

आरोपी प्रेम प्रकाश लग्जरी लाइफ जीने का शौकीन था। वह ठगी के लिए लड़कियों को भी अपने जाल में फंसाता था। वह टैंगो नाम की डेटिंग एप पर सक्रिय था, जहाँ से लड़कियों के नंबर जुटाए जाते थे, या फिर वह टैगो डेटिंग ऐप के कर्मचारियों को कमीशन का लालच देकर युवतियों के मोबाइल नंबर लेता था। वह इन युवतियों को मैसेज और कॉल करके फंसाता था, और अपनी लग्जरी लाइफ दिखाकर झांसे में लाता था। इसके बाद उन्हें मुंबई, गोवा और अन्य शहरों की यात्रा करवाता और फिर उन्हें टेलीकॉलर बना देता था। प्रेम प्रकाश ने लखनऊ के विजयंत खंड में स्टडी पाथवे कंसलटेंसी का ऑफिस बनाया था, जहाँ करीब 50 कर्मचारी काम करते थे। क्लाइंट के आने पर वह फोन कॉल पर ऑफिस पहुँचता था।

सेलिब्रिटी को बुलाकर करता था ओपनिंग

प्रेम प्रकाश अपने ठगी के कारोबार को विश्वसनीय बनाने के लिए सेलिब्रिटीज का भी इस्तेमाल करता था। उसने वाराणसी और पटना में कंसलटेंसी फर्म या डीपीएस जूनियर स्कूल की फ्रेंचाइजी के लिए ओपनिंग सेरेमनी आयोजित की थी। इन इवेंट्स में उसने फिल्म स्टार गोविंदा को बुलाया था। प्रयागराज और गोरखपुर/बनारस में हुई एक अन्य ओपनिंग सेरेमनी में अभिनेत्री प्रीति जिंटा को भी बुलाया गया था। प्रेम प्रकाश ने डीपीएस जूनियर स्कूल खोलने की योजना बनाकर 70 लोगों को फ्रेंचाइजी दी थी, जिनसे उसने 3-3 लाख रुपये सिक्योरिटी के रूप में वसूले थे।

जेल से भागकर जी रहा था लग्जरी लाइफ

प्रेम प्रकाश और संतोष ठगी से कमाए पैसों से लग्जरी लाइफ जीते थे। मुख्य आरोपी प्रेम प्रकाश ने लखनऊ में चिनहट स्थित एक अपार्टमेंट में 70 हजार रुपये महीने पर पेंट हाउस किराए पर ले रखा था। वह सऊदी अरब, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, थाईलैंड और स्विट्जरलैंड समेत 6 देशों की यात्रा कर चुका है। उसने लखनऊ में करीब 25 लाख रुपये की ज्वेलरी भी खरीदी थी। प्रेम प्रकाश ठगी करने के लिए अभिनव शर्मा, राजीव सिंह, संजीव सिंह, सर्वेश शुक्ला समेत कई नामों से आईडी बनवाकर हर शहर में अलग आईडी का इस्तेमाल करता था।

आरोपी प्रेम प्रकाश विद्यार्थी का जेल से भागने का इतिहास भी है। वह 6 साल से बिहार की बेऊर जेल में बंद था। 6 सितंबर, 2024 को जब उसे यूपी के सहारनपुर में प्रोडक्शन वारंट के लिए भेजा गया और वह ट्रेन से पटना लौट रहा था, तो शामली के हिंद रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन से कूदकर भाग गया था। उस समय उसके साथ 6 पटना पुलिसकर्मी मौजूद थे। एसआईटी अभी भी उसके लास्ट लोकेशन की जांच कर रही है। पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन, 12 सीपीयू-मॉनिटर, चेक बुक और चार लाख रुपए की नकदी बरामद की है।

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