आरोपी मोहित द्विवेदी (सोर्स- सोशल मीडिया)
कानपुर

Kanpur Murder Case: पुलिस से हुई चूक; बुर्के वाला हत्यारा जेल से बाहर, क्राइम पेट्रोल देखकर रची हत्या की साजिश

Kanpur Murder Case: कानपुर के नवाबगंज में कोचिंग संचालक प्रकाश चंद्र गुप्ता की हत्या के आरोपी मोहित द्विवेदी को विवेचना में साक्ष्यों की कमी से जुड़े तर्कों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई।

अभिनव श्रीवास्तव, स्निग्धा श्रीवास्तव

Highlights:

  • कानपुर कोचिंग संचालक हत्याकांड का आरोपी मोहित द्विवेदी को जमानत

  • क्राइम पेट्रोल और यूट्यूब क्राइम सीरीज देखकर रची की हत्या की साजिश

  • 500 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले, फिर पुलिस ने किया था खुलासा

  • चेन और ब्रेसलेट की बरामदगी से लेकर CCTV फुटेज तक उठे सवाल

Kanpur Coaching Centre Murder Case: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की विवेचना में चूक के चलते एक शातिर कातिल को फायदा मिल गया। नवाबगंज में कोचिंग संचालक की हत्या करने वाला बुर्के वाला कातिल जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ गया। हत्यारोपी ने क्राइम पेट्रोल और यूट्यूब पर क्राइम सीरीज देखकर हत्या करने की जो साजिश रची थी उसका उसे फायदा मिला और न्यायालय ने आरोपी को जमानत दे दी।

क्राइम पेट्रोल और यूट्यूब क्राइम सीरीज देखकर की हत्या

हत्यारोपी मोहित द्विवेदी ने घटना को अंजाम देने से पहले लगभग 15 से 20 दिन क्राइम पेट्रोल और यूट्यूब पर क्राइम की कई सीरीज देखी थी। इसके बाद उसने बड़े ही शातिर ढंग से हत्या करने की योजना बनाई थी। पुलिस को चकमा देने के लिए उसने बुर्का पहना था, लेडिज चप्पल, पर्स, दुपट्टा और दस्ताने पहनने के साथ-साथ गूंगा होने का नाटक किया था जिसका उसे फायदा भी मिला।

मुकदमे के विवेचक न्यायालय के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य उपस्थित नहीं कर पाये जिसका फायदा मिलते हुए शातिर कातिल मोहित द्विवेदी को न्यायालय से जमानत मिल गई। 31 मई 2026 की रात में नवाबगंज में कोचिंग संचालक प्रकाश चंद्र गुप्ता की हत्या कर दी गई थी। उसका शव कोचिंग सेंटर में ही पड़ा मिला था जिसके बाद घटना के खुलासे के लिए पुलिस आयुक्त ने कई टीम गठित कर दी थी और इसके बाद लगभग चार दिन बाद पुलिस ने घटना का खुलासा किया था।

पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने किया था खुलासा

पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना का खुलासा किया था और बताया था कि पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज, तकनीकी साक्ष्य के आधार पर कोचिंग संचालक प्रकाश चंद्र गुप्ता के 18 साल पुराने दोस्त मोहित द्विवेदी को गिरफ्तार किया, उसके पास से लूटा हुआ सोना भी बरामद कर लिया।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि मोहित द्विवेदी ने सोने की चेन और ब्रेसलेट लूटने के लिए क्राइम पेट्रोल और यूट्यूब क्राइम सीरीज देखकर हत्या की योजना बनाई थी। पुलिस को चकमा देने का काफी प्रयास किया लेकिन पुलिस ने सीडीआर रिपोर्ट और सर्विलांस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से लगभग 45000 रुपए और मृतक का सोने की चेन और ब्रेसलेट बरामद किया गया था।

विवेचना में पुलिस से हुई बड़ी चूक

कानपुर कमिश्नरेट के सेंट्रल जोन के नवाबगंज थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 101 सन 2026 की जांच कर रहे विवेचना अधिकारी ने विवेचना में बड़ी लापरवाही की जिसका फायदा मिलते हुए कोचिंग संचालक की हत्या के आरोपी मोहित द्विवेदी को उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने जमानत दे दी। उच्च न्यायालय इलाहाबाद में आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि मुकदमा परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है सिर्फ मुखबिर की सूचना पर मोहित द्विवेदी को आरोपी बना दिया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को आधार बनाया और कहा कि मोहित द्विवेदी बुर्का पहनकर कोचिंग के अंदर गया था जहां शव मिला था, लेकिन पुलिस की जांच के पेज नंबर 129 पर संलग्न सीसीटीवी फुटेज में यह नहीं दिखा कि बुर्का पहनने वाला व्यक्ति कोचिंग के अंदर गया था जहां मृतक का शव मिला था।

आरोपी के वकील ने यह कहा कि पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने बुर्का पहना था तो पहचानना संभव ही नहीं था कि वह व्यक्ति मोहित द्विवेदी ही है। पुलिस ने मोहित द्विवेदी को आरोपी बनाने के लिए सीडीआर रिपोर्ट से लोकेशन निकाली लेकिन मोहित द्विवेदी के वकील ने तर्क दिया कि मोहित द्विवेदी का घर घटनास्थल के पास में ही है इसलिए सीडीआर रिपोर्ट को साक्ष्य नहीं माना जा सकता है।

बुर्का पहनने वाला व्यक्ति मोहित द्विवेदी?

पुलिस ने जिस चेन और ब्रेसलेट को मृतक का बताकर मोहित द्विवेदी के पास से बरामदगी दिखाई उसकी शिनाख्त न ही मुखबिर से और न ही किसी गवाह से करवाई। मोहित द्विवेदी के वकील ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर कोई चोट नहीं थी और मौत का कारण भी अभी स्पष्ट नहीं है। विसरा रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन विसरा रिपोर्ट में अगर यह पता भी चलता है कि मृतक ने कोई जहरीला पदार्थ खाया था तो उसके लिए मोहित द्विवेदी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

फिर भी बिना किसी ठोस साक्ष्य के विवेचक ने केस डायरी में लिख दिया कि बुर्का पहनने वाला व्यक्ति मोहित द्विवेदी है। न्यायालय के समक्ष सरकारी वकील ने जमानत का विरोध तो किया लेकिन मोहित द्विवेदी के वकील द्वारा बताए गए तथ्यों को झुठला नहीं सके क्योंकि रिकॉर्ड पर मोहित द्विवेदी के विरुद्ध कोई अन्य साक्ष्य मौजूद नहीं मिला। इसके बाद उच्च न्यायालय ने आरोपी मोहित द्विवेदी को शर्तों के अनुसार जमानत दे दी। शर्तों को पूरा करने के बाद मोहित द्विवेदी कानपुर जेल से रिहा हो गया।

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