Gorakhpur Roadways Bus Station Project: गोरखपुर शहर के बीचों-बीच स्थित वह बस अड्डा, जहां से रोज हजारों लोग अपने सफर की शुरुआत करते हैं... जहां से पूर्वांचल ही नहीं बल्कि कई राज्यों के लिए बसें रवाना होती हैं... और जिसकी पहचान दशकों पुराने, अंग्रेजों के समय के बने भवन से रही है...
अब वही बस अड्डा इतिहास बनने जा रहा है। योगी सरकार ने गोरखपुर को एक बड़ी सौगात देने का फैसला किया है।
करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से एक बहुमंजिला आधुनिक बस टर्मिनल बनाया जाएगा, जो सिर्फ एक बस स्टेशन नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल का ट्रांसपोर्ट हब बनने की ओर बढ़ रहा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस जमीन पर यह भव्य टर्मिनल बनेगा, वह जमीन कभी गोरखपुर के प्रसिद्ध पुरुषोत्तम दास रईस परिवार ने बस संचालन के लिए प्रशासन को दान में दी थी।आखिर कैसा होगा नया बस टर्मिनल? क्यों खत्म होगी स्टेशन रोड की जाम की समस्या? और कब शुरू होगा निर्माण कार्य?
गोरखपुर का मौजूदा रोडवेज बस स्टेशन लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां मौजूद भवन और व्यवस्थाएं दशकों पुरानी हैं। समय बदला, यात्रियों की संख्या बढ़ी, बसों की संख्या बढ़ी, लेकिन बस अड्डे का ढांचा लगभग उसी पुराने स्वरूप में चलता रहा। आज भी इसी परिसर से प्रतिदिन करीब 1250 बसें पूर्वांचल, अवध, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों के लिए रवाना होती हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में बसों के संचालन के बावजूद यहां की सबसे बड़ी समस्या है—जाम।
अब उत्तर प्रदेश सरकार और परिवहन निगम ने इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है।
करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां बहुमंजिला आधुनिक बस टर्मिनल बनाया जाएगा।
यह टर्मिनल आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधाओं से लैस होगा।
यानी गोरखपुर को मिलेगा ऐसा बस स्टेशन जिसकी तुलना बड़े महानगरों के ट्रांसपोर्ट हब से की जा सकेगी।
और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
यह भी पढ़ें- पंजाब फतह के लिए BJP का महा-प्लान! अमृतसर से लुधियाना तक 3 दिन के दौरे पर रहेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परियोजना अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले जरूरी तकनीकी प्रक्रिया के तहत मिट्टी परीक्षण यानी सॉयल टेस्टिंग का काम पूरा किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले तक विशेषज्ञों की टीम ने जमीन की जांच कर रिपोर्ट तैयार की है। सॉयल टेस्टिंग पूरी होने के बाद अब निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। यानी जिस परियोजना की चर्चा वर्षों से हो रही थी, वह अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है।
गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा यातायात केंद्र माना जाता है। नेपाल सीमा के नजदीक होने के कारण यहां से बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। नया बस टर्मिनल बनने के बाद परिवहन निगम की योजना देश के विभिन्न हिस्सों तक और अधिक बस सेवाएं शुरू करने की है। इससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, यात्रा आसान होगी और गोरखपुर की पहचान एक बड़े क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट हब के रूप में और मजबूत होगी।
कभी गोरखपुर के रईस परिवार द्वारा दान की गई जमीन पर बना साधारण बस अड्डा अब 100 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बहुमंजिला बस टर्मिनल में बदलने जा रहा है। अगर यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो न केवल यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी बल्कि स्टेशन रोड के जाम से भी काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।