रामलला के दरबार में सपरिवार मत्था टेकेंगे अखिलेश यादव (सोर्स: AI जनरेटेड)
अयोध्या

धर्म की पिच पर आए अखिलेश यादव? रामलला के दरबार में मत्था टेकेंगे सपा प्रमुख, धार्मिक यात्रा के सियासी मायने

Akhilesh Yadav Ram Mandir Temple: अखिलेश यादव आगामी 12 दिसंबर को अपनी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव, बेटे-बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अयोध्या पहुंचकर रामलला के दरबार में मत्था टेकेंगे।

अनुराग मिश्रा, नमिता प्रजापति

Highlights:

  • 12 दिसंबर को रामलला के दर्शन कर सकते हैं अखिलेश यादव

  • पत्नी डिंपल यादव, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों भी हो सकते हैं साथ

  • राम मंदिर से दूरी बनाने के आरोपों के बीच दौरे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज

Akhilesh Yadav Visit Ram Mandir: उत्तर प्रदेश की सियासत में राम मंदिर और रामलला का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की खबर ने एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है। अखिलेश यादव आगामी 12 दिसंबर को अपनी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव, बेटे-बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अयोध्या पहुंचकर रामलला के दरबार में मत्था टेकेंगे। इस दौरान वह हनुमानगढ़ी में भी दर्शन-पूजन करेंगे।

अखिलेश यादव पर राम मंदिर के मुद्दे से दूरी का आरोप

समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने इस प्रस्तावित दौरे की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, 12 दिसंबर को शनिवार और हनुमान अष्टमी के अवसर पर अखिलेश यादव सपरिवार अयोध्या पहुंचेंगे। यहां वह सबसे पहले हनुमानगढ़ी में दर्शन कर सकते हैं और इसके बाद राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन करेंगे। परिवार के साथ उनकी यह धार्मिक यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दरअसल, अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही अखिलेश यादव के मंदिर जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। भाजपा के नेता अक्सर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर राम मंदिर के मुद्दे से दूरी बनाने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, सपा प्रमुख भी समय-समय पर धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं।

इस धार्मिक यात्रा में क्या है राजनीतिक दृष्टिकोण?

ऐसे में अखिलेश यादव का पूरे परिवार के साथ रामलला के दरबार में पहुंचना केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। खासकर तब, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं।

अयोध्या का राम मंदिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भावनात्मक और सांस्कृतिक विषय रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव की इस यात्रा के जरिए समाजवादी पार्टी की धार्मिक आस्था से जुड़ी छवि को लेकर भी नए सियासी संदेश की चर्चा हो सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस दौरे को लेकर किसी राजनीतिक उद्देश्य की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल सबकी निगाहें 12 दिसंबर को होने वाले इस प्रस्तावित अयोध्या दौरे पर टिकी हैं।

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