Samajwadi Party Aligarh: अलीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को लेकर जारी एक आदेश सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल हो रहे आदेश में मीडिया कर्मियों और बाहरी लोगों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है। आदेश में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के कक्ष में कोई बाहरी व्यक्ति पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश को लेकर विपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग और शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी रामनाथ सिंह की ओर से जारी बताए जा रहे इस आदेश को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अज्जू इश्हाक ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद मीडिया की आवाज को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अज्जू इश्हाक ने CMO कार्यालय की तुलना किले से करते हुए कहा कि कार्यालय में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यदि मीडिया स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय तक पहुंचेगी तो वहां की कई कमियां सामने आ सकती हैं।
सपा नेता अज्जू इश्हाक ने कहा कि सीएमओ कार्यालय एक किला है, किले में एक तानाशाह है और तानाशाह नहीं चाहता कि उसके किले में कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश करें। अगर उनके किले में कोई सेंड मारेगा तो उनके भ्रष्टाचार की परतें बाहर निकल आएंगे।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीज उपचार के अभाव में तड़प रहे हैं, दम तोड़ रहे हैं। निजी अस्पतालों से रजिस्ट्रेशन के लिए लाखों रुपये की रिश्वत ली जा रही है। आयुष्मान कार्ड को लेकर खिलवाड़ चल रहा है। महंगी से महगी दवाईयां लिखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीएमओ जैसे अधिकारी लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
सपा नेता ने स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि निजी अस्पतालों के पंजीकरण के नाम पर कथित तौर पर बड़ी रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने आयुष्मान कार्ड और दवाओं की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
अज्जू इश्हाक का आरोप है कि निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन और संचालन को लेकर रिश्वतखोरी की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि एक से डेढ़ लाख रुपये तक लिए जाने के आरोपों से संबंधित खबरें भी प्रकाशित हुई थीं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, वायरल आदेश को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। ऐसे में आदेश के पीछे विभाग की वास्तविक मंशा क्या है और इसमें बाहरी लोगों एवं मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाने का आधार क्या है, यह स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सपा नेता ने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे में पारदर्शिता जरूरी है और मीडिया को खबरों की पड़ताल से रोकने के बजाय व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।