Bhagousa Factory Pollution Farmers Protest: अलीगढ़ के अकराबाद क्षेत्र के गांव भगौसा में काली नदी के किनारे संचालित फैक्ट्रियों को लेकर किसानों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले कथित तेजाब, गैस और अन्य रासायनिक पदार्थों से फसल, पानी और पर्यावरण प्रभावित होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
किसानों का कहना है कि प्रदूषण के कारण उनकी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है और खेती तथा ग्रामीण जीवन पर इसका असर दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि काली नदी के किनारे चल रही कुछ फैक्ट्रियों में तेजाब और पोटाश जलाकर कथित तौर पर कच्ची बारूद तैयार की जा रही है। किसानों ने कहा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और गैस के कारण आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है। उनका दावा है कि इसका सीधा असर खेतों और फसलों पर पड़ रहा है।
हालांकि, कच्ची बारूद बनाए जाने और प्रदूषण संबंधी इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर अभी पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब जांच के जरिए वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
किसानों का कहना है कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार खेती पर निर्भर हैं। धान सहित अन्य फसलों के लिए खेतों और पानी की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले रासायनिक पदार्थों के कारण खेतों की स्थिति खराब हो रही है और धान की फसल प्रभावित हुई है।
गांव के किसानों और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बबलू ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्रियों से वास्तव में प्रदूषण फैल रहा है या नियमों के विपरीत किसी प्रकार का उत्पादन किया जा रहा है तो तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसानों की खेती और ग्रामीणों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सुरेश कुमार, रामपाल सिंह, मुकेश कुमार, रामवती देवी और उषा देवी समेत बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन एसीएम को सौंपते हुए फैक्ट्रियों की जांच कराने और कथित प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने मांग की कि फैक्ट्रियों में इस्तेमाल किए जा रहे रसायनों, उत्पादन प्रक्रिया, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और उससे निकलने वाले अपशिष्ट की जांच कराई जाए। साथ ही काली नदी और आसपास के जलस्रोतों की गुणवत्ता की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
ग्रामीणों की शिकायत पर एसीएम पारितोष मिश्रा ने उन्हें समस्या के समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि भगौसा गांव के किसानों द्वारा दिए गए ज्ञापन की जांच कराई जाएगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि काली नदी किनारे संचालित इन फैक्ट्रियों में वास्तव में किस प्रकार की गतिविधियां चल रही हैं, क्या वहां पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है और किसानों की फसल को नुकसान पहुंचने के आरोप कितने सही हैं।
प्रशासनिक जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई से ही इन सवालों का जवाब सामने आएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।