Akhilesh Yadav vs Jayant Chaudhary: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच घमासान बढ़ता जा रहा है। सहारनपुर में अखिलेश यादव की एक रैली को रद्द कर दिया गया है। वैसे तो कहा जा रहा है कि खराब मौसम के कारण रैली को रद्द किया जा रहा है।
वहीं राष्ट्रीय लोकदल पार्टी ने दावा किया है कि चौधरी परिवार पर की गई टिप्पणी के विरोध में यूपी में 36 बिरादरी के बीच विरोध के माहौल के कारण रैली को रद्द किया गया है। समाजवादी पार्टी के महासचिव और रैली के आयोजक चौधरी रुद्रसेन ने रैली के स्थगित होने की जानकारी दी।
रुद्रसेन ने बताया कि मौसम विभाग के अलर्ट को मद्देनजर रखते हुए कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है और नई तारीख अखिलेश यादव से चर्चा करने के बाद सामने आएगी। उन्होंने कहा कि संभावना है कि रैली अक्टूबर महीने के आखिरी हफ्ते में या फिर नवंबर की शुरुआत में आयोजित की जा सकती है।
अखिलेश यादव की रैली रद्द होने की खबर सामने आते ही सियासी हलचल तेज हो गई। हाल ही में जयंत चौधरी को लेकर चवन्नी से रुपया वाले बयान को लेकर पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय में आक्रोश का माहौल है। ऐसे में जाय समुदाय से आने वाले जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है।
सहारनपुर में दोनों दलों की रैलियों का कार्यक्रम सामने आ गया था। 3 सितंबर को जयंत चौधरी की 'स्वाभिमान रैली' निकाली जाने वाली थी। उसी के तीन दिन बाद 6 सितंबर को अखिलेश यादव का 'युवा योद्धा सम्मेलन' होने वाला था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले देखते-ही-देखते सहारनपुर पश्चिमी यूपी की सियासत का केंद्र बनता जा रहा है।
रैली रद्द होने की खबर आने के बाद RLD के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने सपा और अखिलेश यादव पर हमला बोला। रोहित अग्रवाल ने कहा कि चौधरी परिवार हमारा सम्मान और स्वाभिमान है। उस पर अगर टिप्पणी करोगे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उन्हें पैर रखने नहीं देंगे।
टिप्पणी के विरोध में पश्चिमी यूपी की 36 बिरादरी एकजुट हुई और सपा की प्रस्तावित रैली के बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। पार्टी का कहना है कि इसे स्थानीय स्तर पर पैदा हुए जनाक्रोश का परिणाम बताया है।
सहारनपुर में हो रही हलचल को 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के नजरिए से देखा जा रहा है। पश्चिमी यूपी में राजनीतिक मुकाबला तेज हो रहा है, जिसमें एक तरफ जाट वोटरों पर RLD की मजबूत पकड़ है, तो दूसरी तरफ सपा का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण है।
गौर करने वाली बात है कि लगातार हुए दो कार्यक्रमों में पहले जयंत चौधरी की रैली और फिर अखिलेश यादव का कार्यक्रम दोनों पार्टियों ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के मौके के तौर पर इस्तेमाल किया। अखिलेश की रैली टलने से अब नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
SP ने आधिकारिक तौर पर रैली टालने की वजह मौसम के हालात बताई है। हालांकि, RLD का कहना है कि यह फैसला '36 बिरादरी' (इलाके के अलग-अलग समुदायों) के विरोध की वजह से लिया गया। सवाल यह है कि क्या रैली सिर्फ मौसम की वजह से टली, या चौधरी परिवार के बारे में की गई टिप्पणियों से बने राजनीतिक दबाव की भी इसमें कोई भूमिका थी? फिलहाल, सपा ने कोई नई तारीख घोषित नहीं की है।
इस बीच, अखिलेश यादव 2 सितंबर को सहारनपुर का दौरा करने वाले हैं, जहां वे सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन के घर जाएँगे। रैली टलने के बाद इस दौरे के ऐलान ने सहारनपुर में राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।