RLD Social Harmony Conference Meerut: राष्ट्रीय लोकदल द्वारा जनपद मेरठ में अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ द्वारा सामाजिक समरसता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी भाईचारा, समानता, सामाजिक न्याय और सम्मान की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) त्रिलोक त्यागी रहे।
विशिष्ट अतिथियों के रूप में राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ ओ. पी. सागर, राष्ट्रीय सचिव प्रबुद्ध कुमार, प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ एवं पूर्व विधायक भगवती प्रसाद सूर्यवंशी, पूर्व विधायक विनोद हरित तथा प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल (सामाजिक न्याय मंच) सुश्री संगीता दोहरे व क्षेत्रीय अध्यक्ष हस्तिनापुर क्षेत्र तरसपाल मलिक व मण्डल अध्यक्ष इंदरवीर भाटी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के सदस्य नरेंद्र खजूरी ने की तथा संचालन राष्ट्रीय लोकदल अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ, हस्तिनापुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष दीपक गून ने किया।
इस दौरान कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्य अतिथि त्रिलोक त्यागी ने कहा कि सामाजिक समरसता केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर देने की भावना है। अनुसूचित जाति समाज ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और संगठन में उनके कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत, योग्यता और योगदान के अनुरूप जिम्मेदारी और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और सामाजिक समरसता एक-दूसरे के पूरक हैं और समाज को मजबूत बनाने के लिए सभी वर्गों को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी सागर ने कहा कि अनुसूचित जाति समाज के अधिकारों, सम्मान और भागीदारी को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। संगठन के माध्यम से समाज के लोगों की समस्याओं को सामने लाने और कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर देने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय सचिव राष्ट्रीय लोकदल प्रबुद्ध कुमार ने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी की विचारधारा गांव, किसान और मेहनतकश समाज के सम्मान से जुड़ी रही है। समाज की प्रगति तभी संभव है जब सभी वर्गों को साथ लेकर चला जाए और संगठन में प्रत्येक कार्यकर्ता को सम्मान मिले।
प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ एवं पूर्व विधायक भगवती प्रसाद सूर्यवंशी ने कहा कि अनुसूचित जाति समाज ने देश और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समाज के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में भी लगातार प्रयास होना चाहिए।
पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय महासचिव(अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ) विनोद हरित ने कहा कि समाज की विविधता ही उसकी ताकत है। सामाजिक समरसता के लिए जरूरी है कि सभी वर्ग एक-दूसरे के अधिकारों और भावनाओं का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल (सामाजिक न्याय मंच) संगीता दोहरे ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों और अल्पसंख्यक समाज को सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव और समाज के प्रत्येक स्तर पर दिखाई दे और आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल को मुख्यधारा में लाना है।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती आपसी सम्मान, संवाद और भाईचारे से होती है। सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और सामाजिक दूरी को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।