आगरा में आरओबी 17 अक्टूबर से 90 दिनों के लिए बंद
जाम से स्थानीय लोगों और व्यापारियों को दिक्कतें
सड़क नहीं बनी तो व्यापारियों का होगा आंदोलन
ROB Closed In Agra: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल आगरा को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के साथ मेट्रो और अन्य बड़ी परियोजनाओं के जरिए शहर की तस्वीर बदलने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन विकास की इन कोशिशों के बीच शहर की एक सड़क स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। ईदगाह बस अड्डे और खेरिया मोड़ को जोड़ने वाले रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के जीर्णोद्धार के लिए 17 अक्टूबर से 90 दिनों तक यातायात बंद किया गया है। पुल की मरम्मत शुरू होने से लोगों को भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए निर्धारित वैकल्पिक मार्ग की बदहाली ने मौजूदा मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कच्ची और गड्ढों से भरी सड़क पर उड़ती धूल, जगह-जगह कीचड़ और बिगड़ी यातायात व्यवस्था से स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और राहगीरों को रोजाना जूझना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि रेलवे ओवरब्रिज बंद करने से पहले वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त करने की जरूरत थी, लेकिन इस दिशा में समय रहते काम नहीं किया गया। नतीजा यह है कि कुछ मिनटों में पूरा होने वाला सफर अब घंटों में तय हो रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्रीय विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने रेलवे प्रशासन, नगर निगम, यातायात विभाग के अधिकारियों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के साथ बातचीत के दौरान आश्वासन दिया था कि रात में ही सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा। इससे धूल से राहत मिलने, कीचड़ की समस्या दूर होने और यातायात सुचारु होने की उम्मीद जगी थी। इसी भरोसे लोगों ने तत्काल कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं किया।
हालांकि, लोगों का कहना है कि एक सप्ताह बीतने के बाद भी सड़क निर्माण नहीं हुआ है। वैकल्पिक मार्ग की स्थिति जस की तस बनी हुई है और राहगीरों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। अब स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि जब 90 दिनों तक आरओबी बंद रहना है, तो वैकल्पिक रास्ते को आवागमन के योग्य बनाने के लिए समय रहते इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
बाजार कमेटी के अध्यक्ष राजेश यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विधायक ने अधिकारियों और स्थानीय लोगों के सामने रात में सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया था। व्यापारियों को उम्मीद थी कि समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
राजेश यादव ने कहा कि सड़क निर्माण तो नहीं हुआ, लेकिन लोगों को मुफ्त में फ्रैक्चर जरूर मिल रहे हैं। पांच मिनट का रास्ता तय करने में घंटों लग रहे हैं। धूल के गुबार से लोग परेशान हैं और गड्ढों के कारण हादसों का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बाजार और आसपास के क्षेत्र में कारोबार करने वाले व्यापारियों के साथ आम लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
अर्जुन नगर निवासी जितेंद्र लवानिया ने विधायक पर स्थानीय लोगों को केवल आश्वासन देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि रात में सड़क निर्माण की बात कही गई थी। इसी भरोसे लोगों ने न तो जाम लगाया और न ही धरना-प्रदर्शन किया। लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रदेश और केंद्र में भाजपा सरकार होने के बावजूद यदि एक वैकल्पिक सड़क को आवागमन के योग्य नहीं बनाया जा सकता, तो विकास के दावों का आम जनता को क्या लाभ मिल रहा है? लोगों ने मांग की कि संबंधित विभाग तत्काल सड़क को दुरुस्त कराएं, ताकि आरओबी बंद रहने की अवधि में लोगों को रोजाना की परेशानी से राहत मिल सके।
स्थानीय लोगों ने 'नवभारत' से विशेष बातचीत में बताया कि सड़क से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि दुकानों में धूल भर रही है, जबकि राहगीरों को भी धूल और गड्ढों के बीच से निकलना पड़ रहा है। कच्चे रास्ते पर वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है।
लोगों के मुताबिक, एक दिन पहले दो लोगों को फ्रैक्चर होने की घटनाएं सामने आई थीं। वहीं, अगले दिन दो बैटरी चालित वाहन भी पलट गए। इन घटनाओं ने सड़क की स्थिति को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि, इन घटनाओं और चोटों के संबंध में आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।
बाजार कमेटी अध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ और लोगों को राहत नहीं मिली, तो व्यापारी व स्थानीय निवासी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने धरना-प्रदर्शन और जाम लगाने की चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो अनशन भी किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि 90 दिनों तक बंद रहने वाले आरओबी के कारण पैदा हुई यातायात समस्या से निपटने के लिए जिम्मेदार विभाग कब तक प्रभावी कदम उठाएंगे? फिलहाल स्थानीय लोग धूल, कीचड़ और गड्ढों से राहत मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आरओबी का जीर्णोद्धार भविष्य में आवागमन बेहतर बनाने की दिशा में जरूरी कदम हो सकता है, लेकिन तब तक वैकल्पिक मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।