Highlights:
डॉक्टरों के नहीं मिलने से मरीजों में नाराजगी, बिना इलाज लौटने की नौबत
तीन प्रमुख मांगों को लेकर कर रहे NHM कर्मचारी हड़ताल
फिलहाल हड़ताल खत्म होने पर असमंजस की स्थिति
NHM Employees Strike Effects Health Services: सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल में खाली पड़े चिकित्सकों के चैंबर और इलाज के लिए भटकते मरीज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिला अस्पताल के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और एसएन मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों को उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मरीजों को बिना उपचार कराए ही लौटने की नौबत आ रही है।
जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा उस समय सामने आया, जब उन्हें चिकित्सकों के चैंबर खाली मिले। मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन संबंधित चिकित्सकों के नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ती गई। नवभारत की टीम ने जब अस्पताल पहुंचे मरीजों से बातचीत की तो उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे लगातार इलाज के लिए अस्पताल आ रहे हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं।
मरीजों का कहना था कि अस्पताल में डॉक्टरों के चैंबर खाली पड़े हैं। ऐसे में वे अपनी बीमारी का उपचार कहां कराएं? अस्पताल तक पहुंचने में समय और पैसा खर्च करने के बावजूद इलाज नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ रही है। मरीजों ने यह भी कहा कि उपचार में देरी का उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
NHM कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बीच अस्पताल में उपलब्ध सरकारी चिकित्सक ही मरीजों को देख रहे हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या और उपलब्ध चिकित्सकीय सेवाओं के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इलाज के लिए इंतजार कर रहे मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल पाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
जिला अस्पताल में खाली चैंबरों की स्थिति केवल कर्मचारियों की अनुपस्थिति का मामला नहीं है, बल्कि उन मरीजों की परेशानी भी सामने लाती है, जिन्हें समय पर उपचार की जरूरत है। खासकर दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए बिना इलाज लौटना अतिरिक्त मुश्किल पैदा कर सकता है।
दूसरी ओर, NHM के स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर लखनऊ में धरना दे रहे हैं। मांगों के समर्थन में कर्मचारी आंदोलन पर डटे हुए हैं। हड़ताल कब समाप्त होगी और कर्मचारियों की मांगों पर शासन की ओर से कब निर्णय लिया जाएगा, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को राहत देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी हो गया है।
NHM कर्मचारियों की मांगों और उनके आंदोलन के बीच सबसे बड़ी चुनौती आम मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। बीमारी से परेशान मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं तो उनकी पहली उम्मीद डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज की होती है। ऐसे में खाली चैंबर और लंबा इंतजार उनकी परेशानी को और बढ़ा देते हैं।
अब सवाल यह है कि हड़ताल के बीच जिला अस्पताल, CHC और एसएन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था की जाएगी? साथ ही, NHM कर्मचारियों की मांगों पर समाधान निकालकर हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में कब कदम उठाए जाएंगे? फिलहाल, आंदोलन का असर मरीजों की परेशानी के रूप में सामने आ रहा है और सबसे अधिक मुश्किल उन लोगों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है।