Agra Gurmat Samagam 2026: गुरुद्वारा गुरु का ताल में आयोजित 39वें सालाना तीन दिवसीय गुरमत समागम के दूसरे दिन गुरु वाणी, कीर्तन और कथा विचार की ऐसी धारा बही कि पूरा परिसर श्रद्धा और भक्ति के रंग में नजर आया। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे प्रख्यात रागी जत्थों, प्रचारकों और सिंह साहिबान ने इलाही वाणी के माध्यम से संगत को गुरु चरणों से जोड़ा। साथ ही नई पीढ़ी को सिक्खी की परंपराओं और गुरु मर्यादा से जुड़ने का संदेश दिया।
दूसरे दिन का पहला दीवान भाई नंदलाल दीवान हॉल में सुबह आठ बजे शुरू हुआ। गुरु ग्रंथ साहिब जी की सवारी के दीवान हॉल में पहुंचने और गुरु महाराज के प्रकाश के साथ कीर्तन समागम का शुभारंभ हुआ। सबसे पहले गुरुद्वारा गुरु का ताल में संचालित गुरमत विद्यालय के बच्चों ने कीर्तन कर संगत को निहाल किया। इसके बाद गुरुद्वारा गुरु का ताल के हजूरी रागी जत्थों ने अपनी हाजिरी लगाई।
समागम में विशेष रूप से पहुंचे रागी भाई हरजोत सिंह जख्मी और भाई तरनवीर सिंह रब्बी ने गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत किया। वहीं पंजाब से आई बीबी दिलेर कौर खालसा के दाढ़ी जत्थे ने वीर रस में गुरुओं की शौर्य गाथाओं का गायन कर संगत में जोश भर दिया।
इसके अलावा गुरुद्वारा बगला साहिब नई दिल्ली के हेड ग्रंथी ज्ञानी रणजीत सिंह, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब चांदनी चौक दिल्ली के हेड ग्रंथी ज्ञानी अंग्रेज सिंह, दरबार साहिब अमृतसर से आए सिंह साहिब निशान सिंह और पंजाब के कथा वाचक भाई रणजीत सिंह गौहरे मस्कीन ने कथा विचार के माध्यम से संगत को गुरमत के सिद्धांतों से अवगत कराया। उन्होंने नई पीढ़ी को सिक्खी की राह पर चलते हुए गुरु मर्यादा का पालन करने और गुरु वाणी से जुड़ने का संदेश दिया।
सुबह से देर रात तक चले कीर्तन दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। गुरुद्वारा परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा गुरु का ताल की सेवा संभालकर उसे भव्यता प्रदान करने वाले संत बाबा साधू सिंह जी मौनी और बाबा निरंजन सिंह जी की स्मृति में प्रतिवर्ष गुरमत समागम आयोजित किया जाता है।
दूसरे दीवान की शुरुआत शाम छह बजे रहिरास साहिब के पाठ से हुई। इसके बाद देर रात तक कीर्तन और कथा विचार का सिलसिला चलता रहा। रात करीब दो बजे आनंद साहिब के पाठ के बाद समाप्ति अरदास और हुकुमनामे के साथ दीवान संपन्न हुआ।
गुरमत समागम में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर, पीलीभीत के साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश के धौलपुर, डबरा, ग्वालियर और पंजाब से भी बड़ी संख्या में संगत पहुंची। बाहर से आने वाली संगत के ठहरने से लेकर भोजन और चाय तक की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
कई वर्षों से लंगर की सेवा संभाल रहे बाबा अमरीक सिंह ने बताया कि कीर्तन समागम के दौरान 24 घंटे लंगर और चाय की सेवा जारी रहती है। हर चार से पांच घंटे के अंतराल पर अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इनमें उड़द और चने की दाल, मूंग की दाल, बेसन की कढ़ी, आलू की सब्जी, पूरी, खीर और विशेष रूप से जलेबी शामिल हैं।
लंगर तैयार करने और वितरित करने में बड़ी संख्या में सेवादार जुटे हुए हैं। सितारगंज से भाई मंजसेवा समिति के 150 से अधिक सदस्य प्रतिवर्ष विशेष रूप से सेवा के लिए पहुंचते हैं।
समागम के दौरान संत बाबा प्रीतम सिंह स्वयं कीर्तन दरबार के साथ-साथ संगत के ठहरने, लंगर और चाय सहित अन्य व्यवस्थाओं का लगातार निरीक्षण करते नजर आए।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह जस्सी ने बताया कि समागम के अंतिम दिन 3 अक्टूबर को सुबह गुरुद्वारा मंजी साहिब में अमृत संचार कराया जाएगा। अमृत पान करने वाले श्रद्धालुओं से सुबह केसी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर सुबह नौ बजे तक गुरुद्वारा मंजी साहिब पहुंचने की अपील की गई है।
दिल्ली से आए पंज प्यारे श्रद्धालुओं को अमृत पान कराएंगे। अमृत पान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ककार दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।
समागम में जत्थेदार बाबा पाल सिंह सितारगंज, जत्थेदार बाबा अमर सिंह बंडा शाहजहांपुर, जत्थेदार सतनाम सिंह निजामाबाद, महंत महेंद्र सिंह, राजू सलूजा, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कवलदीप सिंह, हेड ग्रंथी गुरुद्वारा माईथान ज्ञानी कुलविंदर सिंह, दलजीत सिंह सेतिया, उपेंद्र सिंह लवली, बॉबी वालिया, परमजीत सिंह सरना, श्याम भोजवानी, चौधरी मनजीत सिंह, महंत हरपाल सिंह, ग्रंथी अजायब सिंह टीटू, ग्रंथी हरबंस सिंह, ग्रंथी सतवीर सिंह सुशील, हरनाम सिंह, ज्ञानी केवल सिंह और भाई जोगा सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।