चीनी की कीमतें (सोर्स- सोशल मीडिया)
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कंट्रोल में आईं चीनी की कीमतें, सरकार के कड़े फैसलों से थमी महंगाई, ग्राहकों को बड़ी राहत

Rising Sugar Price: त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने जमाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए व्यापारियों के लिए सख्त स्टॉक सीमाएं लागू कर दी हैं।

प्रिया सिंह

Stable Indian Sugar Price: त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ समय में खुदरा बाजार में चीनी के दाम 48.18 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए। कीमतों में इस तेजी के पीछे अत्यधिक बारिश, गन्ने की फसल को नुकसान, उत्पादन में गिरावट और जमाखोरी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और वैश्विक बाजार में चीनी की कमी ने भी दबाव बढ़ाया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने स्टॉक लिमिट समेत कई कदम उठाए हैं।

बारिश और बीमारियों से गन्ने की फसल प्रभावित

चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के पीछे मौसम की भी बड़ी भूमिका रही है। देश के कई गन्ना उत्पादक राज्यों में भारी बारिश और जलभराव के कारण खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा। इससे गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा।

इसके अलावा रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों ने भी खड़ी फसल को प्रभावित किया। इसका असर अनुमानित चीनी उत्पादन पर पड़ा। उत्पादन का अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन से घटकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह गया।

वैश्विक कमी ने बढ़ाई कीमतों की चिंता

घरेलू उत्पादन में कमी के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है। इस साल दुनियाभर में करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी का अनुमान लगाया गया है।

वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी के चलते अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में करीब 16 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। घरेलू बाजार में बढ़ती मांग के बीच कुछ व्यापारियों और मिलों पर जमाखोरी तथा सट्टेबाजी के आरोप भी सामने आए, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ा।

सरकार ने लागू की स्टॉक लिमिट

बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने चीनी व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और खुदरा कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट के नियम लागू किए हैं। इसका उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके रखने और कृत्रिम कमी पैदा करने की संभावनाओं को रोकना है।

इसके साथ ही घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने टैक्स फ्री आयात की सुविधा भी दी है। सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन में बाजार में नई चीनी की आपूर्ति बढ़ने के बाद कीमतों पर दबाव कम होगा।

10 साल में गन्ने का उत्पादन बढ़ा

लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में गन्ने के उत्पादन और खेती के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में देश में गन्ने का उत्पादन करीब 348.44 मिलियन मीट्रिक टन था।

वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 500 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। इसी अवधि में गन्ने की खेती का रकबा भी 49.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 58.87 लाख हेक्टेयर हो गया।

किसानों के लिए बढ़ी FRP

गन्ना किसानों की आय और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 2026-27 चीनी सीजन के लिए गन्ने की उचित और लाभकारी कीमत यानी FRP को बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। वर्ष 2016-17 में यह 230 रुपये प्रति क्विंटल थी।

इसके अलावा अतिरिक्त गन्ने से एथेनॉल उत्पादन ने चीनी मिलों के लिए आय का एक और स्रोत तैयार किया है। अगस्त 2026 तक करीब 97 फीसदी गन्ना किसानों को उनके बकाया भुगतान का सीधा वितरण किए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि त्योहारी मांग के बीच चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखते हुए किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाया जाए।

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