ओला, उबर और रैपिडो ऐप से एडवांस टिप फीचर हटाने का आदेश फोटो (सोर्स- AI जनरेटेड)
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Ride Booking: ओला, उबर और रैपिडो को सरकार का बड़ा आदेश, ऐप से हटाएं एडवांस टिप फीचर

Advance Tip Rule: केंद्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म से एडवांस टिप का ऑप्शन हटाने का सख्त आदेश दिया है जिससे कि यात्रियों को अब एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा।

प्रिया सिंह

New Advance Tip Policy: केंद्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसे बड़े ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर्स को अपने मोबाइल ऐप्स से एडवांस टिप का ऑप्शन तुरंत प्रभाव से हटाने का कड़ा आदेश जारी किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में सभी कंपनियों को एक आधिकारिक सर्कुलर भेजा है।

मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इस एडवांस टिप फीचर के कारण यात्रियों पर राइड बुक करते समय मानसिक रूप से अतिरिक्त भुगतान करने का अनुचित दबाव बन रहा था। सरकार का मानना है कि यात्रियों पर किसी भी प्रकार से अतिरिक्त राशि देने का दबाव बनाना कानूनन पूरी तरह गलत है।

एडवांस टिप का ग्राहकों पर दबाव

मंत्रालय के सर्कुलर में स्पष्ट लिखा है कि ऐप पर पहले से टिप का विकल्प होने से यात्रियों को लगता था कि एक्स्ट्रा पेमेंट करने पर ही कैब जल्दी मिल सकेगी। इस कारण लोगों को पहले से ही टिप देने के लिए विवश होना पड़ता था, जो कि पूर्णतः अनुचित है।

सरकारी आदेश के अनुसार, किसी भी राइड के लिए ड्राइवर को टिप देना पूरी तरह से यात्री की अपनी मर्जी पर निर्भर करता है। ऐसे में कंपनियों द्वारा इसे अपने ऐप में एक डिफॉल्ट या एडवांस फीचर के रूप में दिखाना गलत और अस्वीकार्य है।

सर्ज चार्ज के साथ एक्स्ट्रा बोझ

हाई डिमांड या ऑफिस आवर्स के समय ओला और उबर जैसी कैब कंपनियां पहले से ही कस्टमर से सर्ज चार्ज के रूप में अतिरिक्त किराया वसूलती हैं। ऐसे में ऐप में ऊपर से एडवांस टिप का ऑप्शन जोड़ने से यात्रियों की जेब पर बेवजह भारी आर्थिक बोझ बढ़ जाता था।

देश के बड़े और छोटे शहरों में ऑनलाइन राइड बुकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार चाहती है कि कंपनियां किराए, कैब के आने के समय और अन्य सभी तरह के चार्जेस में पूरी पारदर्शिता बनाए रखें ताकि उपभोक्ताओं को कोई भ्रम न हो।

उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शिता

सरकार का कहना है कि किसी भी हाल में यात्रियों पर टिप देने या मांगने का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। इस नए निर्देश के बाद अब ऐप कंपनियों और ग्राहकों के बीच होने वाला यह बड़ा भ्रम और सिरदर्द पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।

केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी यात्री अपनी मर्जी के बिना किसी भी तरह का कोई एक्स्ट्रा पेमेंट न करे। इस नए कदम से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी और भारतीय डिजिटल कैब सेक्टर में अधिक पारदर्शिता आएगी।

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