FASTag के नए नियम (सोर्स-सोशल मीडिया)
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FASTag पोर्टेबिलिटी का नया नियम, बैंक बदलते ही लागू होगा 6 महीने का लॉक-इन, जानें लिमिट और प्रोसेस

FASTag Port Rules: फास्टैग को एक बैंक से दूसरे में पोर्ट कराने के बाद तुरंत बैंक नहीं बदला जा सकता। FASTag बैंक बदलने के बाद दोबारा पोर्ट कराने हेतु 6 महीने यानी 180 दिन का इंतजार करना होगा।

प्रिया सिंह

FASTag Port New Bank Rules: देश में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए फास्टैग से जुड़ा एक बेहद इंपॉर्टेंट रूल जानना बहुत जरूरी है। अगर आप अपने फास्टैग को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट कराने की प्लानिंग कर रहे हैं या हाल ही में पोर्ट कराया है, तो यह खबर आपके काम की है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI और संबंधित फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस द्वारा फास्टैग पोर्टेबिलिटी को लेकर क्लियर रूल्स निर्धारित किए गए हैं। इन रूल्स के अनुसार फास्टैग का बैंक बदलने के बाद वाहन चालक तुरंत या बार-बार अपना बैंक नहीं बदल सकते हैं, बल्कि इसके लिए तय टाइम लिमिट लागू होती है।

फास्टैग पोर्ट कराने पर नहीं बदलना होगा टैग

फास्टैग को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट कराने पर वाहन मालिक को विंडस्क्रीन पर लगा पुराना फास्टैग हटाने की जरूरत नहीं होती। पोर्टिंग के दौरान गाड़ी पर लगा फिजिकल टैग वही रहता है और नया टैग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस प्रोसेस में फास्टैग से जुड़ा बैंक अकाउंट और डिजिटल वॉलेट बदला जाता है।

यानी वाहन चालक को केवल बैंक से जुड़ी इंफॉर्मेशन में बदलाव करना होता है, जबकि गाड़ी पर लगा फास्टैग पहले की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। फास्टैग पोर्टेबिलिटी की यह फैसिलिटी वनटैग के जरिए उपलब्ध कराई जाती है। इसके जरिए वाहन चालक बिना नया फास्टैग खरीदे अपने मौजूदा टैग को किसी दूसरे ऑथराइज्ड बैंक या वॉलेट से जोड़ सकते हैं।

बैंक बदलने के बाद 6 महीने का इंतजार जरूरी

फास्टैग पोर्ट करने की फैसिलिटी होने के बावजूद बैंक को बार-बार बदलने पर टाइम लिमिट लागू है। अगर वाहन चालक एक बार अपने फास्टैग को किसी दूसरे बैंक में पोर्ट कराता है, तो उसके तुरंत बाद किसी तीसरे बैंक में इसे ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

फास्टैग पोर्टिंग रूल्स के अनुसार दोबारा बैंक बदलने के लिए 6 महीने यानी 180 दिनों की अवधि पूरी होने का इंतजार करना होगा। इसका मतलब है कि बैंक बदलने के बाद अगले 180 दिनों तक फास्टैग नए बैंक और उससे जुड़े वॉलेट के साथ एक्टिव रहेगा।

180 दिन पूरे होने के बाद ही वाहन चालक दोबारा किसी अन्य ऑथराइज्ड बैंक में फास्टैग पोर्ट कराने के लिए एलिजिबल होगा। इसलिए बैंक बदलने से पहले अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही ऑप्शन चुनना जरूरी है।

बार-बार फास्टैग बैंक बदलने पर क्यों है रोक?

फास्टैग में 6 महीने की लॉक-इन पीरियड रखने का उद्देश्य टोल कलेक्शन सिस्टम में स्टेबिलिटी बनाए रखना है। बार-बार बैंक बदलने से डिजिटल वॉलेट, केवाईसी वेरिफिकेशन और टोल प्लाजा पर लगे ऑटोमैटिक स्कैनर सिस्टम में टेक्निकल प्रॉब्लम आने की आशंका रहती है।

बैंक बदलने की तय अवधि से टोल फीस के पेमेंट, बैंक अकाउंट्स के सेटलमेंट और फास्टैग से जुड़े रिकॉर्ड को ऑर्गनाइज्ड रखने में मदद मिलती है। इससे सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने और संभावित गड़बड़ियों को कंट्रोल करने में भी सुविधा होती है।

फास्टैग पोर्ट कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर वाहन चालक फास्टैग का बैंक बदलने की प्लानिंग कर रहा है, तो उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि पोर्टिंग के बाद तुरंत दूसरा बैंक चुनने का ऑप्शन नहीं मिलेगा। नए बैंक से जुड़ने के बाद 180 दिनों की अवधि पूरी करनी होगी।

इस दौरान वाहन पर लगा फास्टैग इस्तेमाल किया जा सकता है और टोल पेमेंट की प्रोसेस नॉर्मल रूप से जारी रहती है। 6 महीने की अवधि पूरी होने के बाद ही जरूरत के अनुसार फास्टैग को किसी अन्य ऑथराइज्ड बैंक में दोबारा पोर्ट कराया जा सकता है।

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