Call करने पर अब दिखेगा नाम। Source. Pixabay
टेक्नॉलजी

1 नवंबर से मोबाइल पर दिखेगा कॉल करने वाले का नाम? CNAP सर्विस से जुड़े नियम जान लें

1 November Telecom Rule: मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आने पर अब कॉल करने वाले का नाम भी दिखाने की तैयारी है। जिसके लिए CNAP तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

सिमरन सिंह

Highlight:

  • अनजान नंबर पर दिखेगा अब कॉल आने पर नाम।

  • CNAP तकनीक का इस्तेमाल इसमें किया जा रहा है।

  • Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप पर निर्भर कम करने के लिए ये काम किया गया।

India Govt Mandates Caller Names Display: मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आने पर अब सिर्फ नंबर नहीं कॉल करने वाले का नाम भी दिखाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि इसके लिए Calling Name Presentation (CNAP) तकनीक पर काम किया जा रहा है। जिसका मकसद कॉल करने वाले की पहचान बताकर यूजर्स को संदिग्ध कॉल पहचानने में मदद करना है। लेकिन 1 नवंबर से सभी स्मार्टफोन यूजर्स के लिए यह सुविधा अनिवार्य होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए इसे लागू हो चुका नियम मानने से पहले दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की ताजा जानकारी देखना जरूरी है।

क्या है CNAP सर्विस और कैसे करेगी काम?

CNAP के बारे में बताए तो इसका पूरा नाम Calling Name Presentation है। वहीं इस तकनीक के जरिए मोबाइल नेटवर्क कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ा नाम रिसीव करने वाले के फोन पर दिखा सकता है। जिसके लिए Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।

वहीं दूरसंचार विभाग (DoT) ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी सर्कुलर में टेलीकॉम कंपनियों को 1 नवंबर 2026 से 4G और उससे नई तकनीक वाले वायरलेस नेटवर्क पर CNAP सर्विस शुरू करने का निर्देश दिया है। यह सुविधा अलग से रिक्वेस्ट किए बिना उपलब्ध कराने को कहा गया है। लेकिन 2G, 3G और लैंडलाइन नेटवर्क के लिए अलग से विचार किया जाएगा।

सिम किसके नाम पर है उसी का नाम दिखेगा?

इस सर्विस में नाम दिखाने के लिए टेलीकॉम कंपनी के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड का इस्तेमाल होगा। अगर कॉल करने वाले का नंबर रिसीवर के फोन में सेव है तो पहले से सेव नाम दिखेगा। वहीं नंबर सेव नहीं होने पर घरेलू कॉल के लिए CNAP के तहत कॉलर की पहचान दिखाई जा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में केवल सिम के KYC वाले नाम को ही दिखाना अनिवार्य होगा। DoT के निर्देशों में सत्यापन के बाद ग्राहक का पसंदीदा नाम दर्ज करने की व्यवस्था भी शामिल है।

क्या साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम?

CNAP का उद्देश्य अनजान कॉल की पहचान करने में मदद करना और यूजर्स को कॉल उठाने से पहले बेहतर फैसला लेने का मौका देना है। इससे फर्जी पहचान के जरिए ठगी करने वाले कुछ लोगों को पहचानना आसान हो सकता है। लेकिन सिर्फ नाम देखकर किसी कॉल को सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। ठग किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग भी कर सकते हैं। इसमें बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, OTP या पासवर्ड फोन पर साझा न करें। वहीं CNAP के साथ स्पैम अलर्ट और सतर्कता भी जरूरी है।

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