एंथ्रोपिक के पावरफुल एआई 'Mythos 5' (सोर्स-सोशल मीडिया) 
टेक्नॉलजी

AI Model Ban: ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला, एंथ्रोपिक के पावरफुल एआई 'Mythos 5' को रातों-रात किया बंद

AI Model Ban: ट्रंप सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर एंथ्रोपिक के एआई 'क्लॉड फेबल 5' और 'मिथोस 5' को सस्पेंड किया है। इससे भारत के टेक डेवलपर्स को बहुत ही भारी झटका लगा है।

प्रिया सिंह

US Govt AI Model Ban: टेक इंडस्ट्री से एक बहुत ही हैरान करने वाली बड़ी खबर सामने आई है। अभी एक दिन पहले ही दिग्गज अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने भारत को अपना दूसरा सबसे बड़ा बाजार बताया था। इसके लिए कंपनी टीसीएस के साथ एक बहुत बड़ी डील करने जा रही थी जिससे सभी खुश थे। लेकिन सिर्फ चौबीस घंटे के अंदर ही भारतीय डेवलपर्स की इन सभी बड़ी उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।

अमेरिकी सरकार ने एक सख्त एक्सपोर्ट कंट्रोल आदेश जारी करके एंथ्रोपिक पर बड़ी रोक लगा दी है। इसके तहत एंथ्रोपिक के एडवांस और पावरफुल एआई टियर, क्लॉड फेबल 5 का एक्सेस सस्पेंड हो गया है। इसके साथ ही क्लॉड मिथोस 5 का एक्सेस भी विदेशी ग्राहकों के लिए पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया गया है। वाणिज्य मंत्रालय के इस बड़े फैसले के बाद कंपनी ने ग्राहकों के लिए दोनों सिस्टम बंद कर दिए हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा खतरा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह बैन नेशनल सिक्योरिटी के लिए लगा है। यह पहली बार है जब अमेरिकी सरकार ने किसी अमेरिकी कंपनी के मॉर्डन एआई मॉडल को ऐसे रोका है। इससे पहले बाइडेन और ट्रंप सरकार ने सेमीकंडक्टर तथा सुपरकंप्यूटर जैसी अहम तकनीकों की पहुंच को रोका था। एआई तकनीक के बहुत ज्यादा आउट ऑफ कंट्रोल होने के भारी खतरे को देखते हुए यह कड़ा फैसला लिया गया है।

सुपर एडवांस एआई की ताकत

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इन सुपर एडवांस एआई मॉडल्स की ताकत बहुत ही ज्यादा खतरनाक स्तर की है। क्लॉड मिथोस 5 और फेबल 5 का इस्तेमाल अहम कोडिंग और गंभीर साइबर सिक्योरिटी में आसानी से किया जा सकता है। अमेरिकी सरकार का स्पष्ट मानना है कि इतनी पावरफुल टेक्नोलॉजी को बिना नियम के बाजार में नहीं उतारा जा सकता। भले ही वह देश अमेरिका के कितने भी करीब क्यों ना हो, इन सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

भारतीय स्टार्टअप्स पर बुरा असर

देश के स्टार्टअप्स और एआई रिसर्च सेक्टर में अमेरिकी सरकार के इस फैसले का बहुत ही व्यापक असर देखने को मिल सकता है। जो भारतीय रिसर्चर्स इन एआई टूल्स के जरिए अपने अहम प्रोजेक्ट्स पूरे कर रहे थे, उनका जरूरी काम अब बीच में ही अटक गया है। एंथ्रोपिक की योजना बड़े पैमाने पर इन बेहतरीन मॉडल्स को भारतीय आईटी कंपनियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने की थी। अब इस पूरे प्लान को री-स्ट्रक्चर करना होगा जो कि इन सभी कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होगी।

विदेशी एआई पर निर्भरता घटेगी

इस अप्रत्याशित झटके के बाद अब भारत के पूरे आईटी और टेक सेक्टर को एक नया और बड़ा सबक मिल गया है। इस घटना से यह बात पूरी तरह से साफ हो गई है कि विदेशी एआई मॉडल्स पर निर्भरता तुरंत कम करनी होगी। भारतीय टेक मार्केट को अब अपने खुद के सुरक्षित और स्वदेशी एआई टूल विकसित करने पर ज्यादा से ज्यादा जोर देना होगा। विदेशी कंपनियों के भरोसे रहने से भविष्य में भी ऐसे भारी नुकसान और जरूरी काम रुकने का खतरा हमेशा ही बना रहेगा।

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