चांद पर हादसा Image- Social Media
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चांद पर कैसे हुआ हादसा? 8690 kmph की स्पीड से रॉकेट टकराने से हुआ भीषण धमाका, सामने आया खौफनाक VIDEO

Falcon 9 Moon Crash: स्पेसएक्स का Falcon 9 रॉकेट 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से चांद से टकराकर नष्ट हो गया। दक्षिण कोरिया के Danuri ऑर्बिटर ने टक्कर और नए बने क्रेटर की तस्वीरें रिकॉर्ड कीं।

अर्पित शुक्ला

SpaceX Falcon 9 Moon Crash Video: स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट चांद की सतह से टकराकर नष्ट हो गया। करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुई इस टक्कर के बाद चंद्रमा के आइंस्टीन क्रेटर के पास एक नया गड्ढा बन गया। इस पूरी घटना को दक्षिण कोरिया के चंद्र ऑर्बिटर दानूरी (Danuri) ने अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया। ऑर्बिटर ने टक्कर से पहले और बाद की तस्वीरें भी भेजी हैं, जिनसे चंद्र सतह पर हुए प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

कैसे हुआ हादसा?

फाल्कन 9 रॉकेट को जनवरी 2025 में दो निजी चंद्र लैंडर ब्लू घोस्ट और रेजिलिएंस को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन पर लॉन्च किया गया था। ब्लू घोस्ट मार्च 2025 में सफलतापूर्वक चांद पर उतर गया। रेजिलिएंस लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मिशन के बाद फाल्कन 9 का पहला चरण पृथ्वी पर लौट आया, लेकिन दूसरा चरण ईंधन खत्म होने के कारण अंतरिक्ष में भटकता रहा। करीब 4,000 किलोग्राम वजनी यह रॉकेट समय के साथ गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में चांद की ओर खिंच गया और आखिरकार उसकी सतह से टकरा गया।

दानूरी ने कैद की पूरी घटना

दक्षिण कोरिया के कोरिया एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (KARI) के अनुसार, दानूरी ऑर्बिटर ने टक्कर से लगभग 30 मिनट पहले निगरानी शुरू कर दी थी। ऑर्बिटर ने प्रभाव वाले क्षेत्र के ऊपर कई बार उड़ान भरते हुए कुल आठ इमेजिंग सेशन पूरे किए। इससे वैज्ञानिकों को टक्कर से पहले और बाद की स्थिति की तुलना करने का मौका मिला। तस्वीरों में नए बने क्रेटर और मलबे के निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

वैज्ञानिकों को क्या मिलेगा फायदा?

यह घटना वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्हें पहले से ही रॉकेट का वजन और टक्कर की अनुमानित गति पता थी। वैज्ञानिकों का अनुमान था कि इस टक्कर से लगभग 27 मीटर चौड़ा क्रेटर बनेगा। अब दानूरी द्वारा जुटाए गए आंकड़ों की तुलना नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) के डेटा से की जाएगी, जिससे चंद्रमा की सतह और उसकी संरचना को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

चांद से किसी मानव-निर्मित रॉकेट की टक्कर पहली बार नहीं हुई है। मार्च 2022 में चीन के लॉन्ग मार्च-3C रॉकेट का हिस्सा भी चंद्रमा से टकराया था। अपोलो मिशनों के दौरान नासा ने भी वैज्ञानिक अध्ययन के लिए सैटर्न-5 रॉकेट के कुछ चरणों को जानबूझकर चंद्रमा पर गिराया था। यह घटना अंतरिक्ष में बढ़ते स्पेस डेब्रिस (अंतरिक्ष मलबे) की समस्या को भी सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों की संख्या बढ़ने के साथ ऐसे निष्क्रिय रॉकेट और उपकरणों के सुरक्षित निपटान की बेहतर रणनीति विकसित करना आवश्यक होगा।

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