Bio Solar Roof India: सोलर पैनल से बिजली बनाना आज घरों और कंपनियों के लिए आम बात होती जा रही है लेकिन क्या आपने Bio-Solar के बारे में सुना है? यह ऐसी तकनीक है जिसमें सोलर पैनल के साथ छत पर पौधों और हरियाली का इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर Bio-Solar Roof में सोलर पैनल को ग्रीन रूफ के ऊपर लगाया जाता है। इसका मकसद सिर्फ बिजली पैदा करना नहीं बल्कि गर्मी को नियंत्रित करके पैनल और इमारत दोनों की कार्यक्षमता बढ़ाना है।
इस तकनीक को आसान भाषा में समझें तो Bio-Solar में फोटोवोल्टिक सोलर पैनल और ग्रीन रूफ को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें छत पर मिट्टी, सेडम या छोटे पौधों की हरित परत तैयार की जाती है और उसके कुछ ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं। यहां दोनों एक-दूसरे के लिए फायदेमंद साबित होते हैं। जिससे पौधे आसपास के तापमान को कम रखने में मदद करते हैं जबकि पैनल पौधों को कुछ हद तक सीधी धूप से बचाकर छांव देते हैं। जिसका सीधा मतलब है कि एक ही छत पर बिजली उत्पादन और हरियाली का कॉम्बिनेशन तैयार हो जाता है।
देखा गया है कि आमतौर पर सोलर पैनल कंक्रीट, टीन शेड या डामर जैसी सतहों पर लगाए जाते हैं। तेज धूप में ऐसी छतें काफी गर्म हो सकती हैं और ज्यादा तापमान सोलर पैनल की दक्षता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में Bio-Solar Roof में पौधे पत्तियों के जरिए पानी की भाप छोड़ते हैं जिससे आसपास की हवा प्राकृतिक रूप से ठंडी रहने में मदद मिलती है। वहीं नतीजतन पैनल के आसपास का तापमान नियंत्रित रह सकता है।
इसको लेकर कुछ रिसर्च और रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ठंडे वातावरण के कारण Bio-Solar सिस्टम में सोलर पैनल से 5% से 15% तक ज्यादा बिजली उत्पादन संभव हो सकता है। लेकिन वास्तविक फायदा मौसम, पौधों, डिजाइन और इंस्टॉलेशन पर निर्भर करेगा।
माना जा राह है कि इस तकनीक का फायदा सिर्फ पैनल तक सीमित नहीं है। छत पर हरियाली होने से सूरज की गर्मी सीधे छत में पहुंचने से कम हो सकती है। इससे घर का अंदरूनी तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और AC या कूलर पर लोड भी घट सकता है। वहीं ऑन-ग्रिड सिस्टम में ज्यादा बिजली उत्पादन से बिल कम करने में मदद मिल सकती है जबकि ऑफ-ग्रिड सिस्टम में अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर किया जा सकता है।
भारत में Bio-Solar Roof अभी शुरुआती दौर में है। इसे लगवाने से पहले स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना बेहद जरूरी है क्योंकि मिट्टी, पौधे और नमी से छत पर अतिरिक्त भार बढ़ सकता है। साथ ही सही ड्रेनेज पौधों की नियमित छंटाई और पैनल पर छाया न पड़ने की व्यवस्था जरूरी है। इंस्टॉलेशन बजट में ग्रीन रूफ और उसके मेंटेनेंस का खर्च भी जरूर शामिल करें