Jio SmartWalls Technology: आज के समय में देश में 5G नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो चुका है और अब अधिकांश शहर इसकी पहुंच में हैं। लेकिन एक समस्या अब भी लाखों यूजर्स को परेशान करती है। इस परेशानी में जैसे ही आप किसी बहुमंजिला इमारत, बंद कमरे, लिफ्ट या बेसमेंट में जाते हैं 5G का तेज नेटवर्क अचानक कमजोर पड़ जाता है या पूरी तरह गायब हो जाता है। इसी चुनौती का समाधान तलाशने के लिए रिलायंस जियो SmartWalls नाम की नई तकनीक पर काम कर रहा है। जिसको लेकर दावा है कि यह तकनीक बिना नए टावर लगाए इमारतों के अंदर भी बेहतर 5G कवरेज देने में मदद कर सकती है।
जानकारी में सामने आया है कि 5G की हाई-स्पीड का राज इसके हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो स्पेक्ट्रम में छिपा है। लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है। इन तरंगों की स्पीड तो बहुत तेज होती है लेकिन ये लंबी दूरी तय नहीं कर पातीं और सीमेंट, कंक्रीट या मोटी कांच की दीवारों को आसानी से पार नहीं कर पातीं। यही कारण है कि कई बार घर के अंदर प्रवेश करते ही फोन 5G से 4G पर स्विच हो जाता है या नेटवर्क पूरी तरह गायब हो जाता है।
SmartWalls तकनीक के बारे में बताए तो यह एक एडवांस टेलीकॉम तकनीक है जिसे तकनीकी भाषा में रीकॉन्फ़िगरेबल इंटेलिजेंट सर्फेस (RIS) कहा जाता है। इसमें पतली और पारदर्शी विशेष शीट्स को इमारतों की दीवारों या कांच पर लगाया जाता है। वहीं खास बात यह है कि ये शीट्स खुद बिजली खर्च नहीं करतीं। ये बाहर मौजूद 5G सिग्नल को पकड़कर उसे उस दिशा में मोड़ देती हैं जहां नेटवर्क पहुंचने में दिक्कत होती है। वहीं अगर आसान भाषा में समझें तो यह किसी स्मार्ट शीशे की तरह काम करती है। जैसे दर्पण सूरज की रोशनी को अंधेरे कोने तक पहुंचा देता है वैसे ही SmartWalls 5G सिग्नल को री-रूट करके उन जगहों तक पहुंचाती है जहां पहले नेटवर्क नहीं मिलता था।
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वहीं इस तकनीक में सबसे बड़ी खासियत यह है कि जियो को हर जगह नए 5G टावर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे कंपनी के नेटवर्क विस्तार की लागत कम होगी और बिना अतिरिक्त स्पेक्ट्रम खरीदे इंडोर कवरेज बेहतर किया जा सकेगा। वहीं आम यूजर्स के लिए भी इसके कई फायदे होंगे। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है तो घर के हर कमरे, बेसमेंट और लिफ्ट में बेहतर 5G स्पीड मिल सकती है।
कॉल ड्रॉप की समस्या कम होगी, वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन गेमिंग का अनुभव बेहतर होगा। साथ ही फोन को लगातार नेटवर्क खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी जिससे बैटरी की खपत भी कम हो सकती है। यदि यह तकनीक सफल रहती है तो भारत में इंडोर 5G अनुभव को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।