Mobile Data Consumption In India: एक समय वो भी था जब मोबाइल डेटा सिर्फ सोशल मीडिया चलाने या मैसेज भेजने तक सीमित था लेकिन आज के समय में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जिसमें यूजर्स वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐप्स और हाई-स्पीड 5G नेटवर्क ने इंटरनेट की खपत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इसको लेकर ताजा रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारतीय अब दुनिया के सबसे ज्यादा मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने वाले लोगों में शामिल हो चुके हैं। वहीं इसकी वजह सस्ते डेटा प्लान और किफायती स्मार्टफोन है जो इंटरनेट को हर वर्ग के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनाते है।
नोकिया की 2025 मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में एक मोबाइल यूजर औसतन 31GB से ज्यादा डेटा हर महीने इस्तेमाल कर रहा है। वहीं एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 36GB प्रति माह का सामने आया है। ऐसे में इस आकंड़े को रोजाना के हिसाब से देखे तो एक भारतीय औसतन 1GB से ज्यादा डेटा प्रतिदिन खर्च करता है। जिसमें लोग वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत की यह डेटा खपत अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे कई विकसित देशों से भी ज्यादा है।
विशेषज्ञों को इस तरह के मामले पर लगता है कि AI आधारित ऐप्स, 4K वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म डेटा खपत बढ़ाने के सबसे बड़े कारण में से एक हैं। जिसमें आज के समय को देखते हुए ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन पर हाई-क्वालिटी वीडियो देखते हैं और घंटों ऑनलाइन कंटेंट को देखते है। वहीं नोकिया की रिपोर्ट भी दिखाती है कि 2025 में भारत का कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक 27 एक्साबाइट प्रति माह से अधिक पहुंच गया था। वहीं 5G डेटा ट्रैफिक सालाना आधार पर 70 प्रतिशत बढ़कर 12.9 एक्साबाइट प्रति माह तक पहुंच चुका है।
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जानकारी में यह भी कहा जा रहा है कि भारत में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार भी डेटा खपत में उछाल की बड़ी वजह बना है। जिसमें रिपोर्ट भी सामने आई है कि मेट्रो शहरों में कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक का 58 प्रतिशत हिस्सा अब 5G नेटवर्क पर आ चुका है। वहीं 2025 के दौरान देश में 89.2 करोड़ सक्रिय 4G डिवाइस मौजूद थे, जिनमें से 38.3 करोड़ से ज्यादा 5G सपोर्ट करते थे। इतना ही नहीं सालभर में बिकने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन 5G सपोर्ट के साथ आ रहे है। इससे साफ है कि आने वाले सालो में भारत की डेटा खपत और तेजी से बढ़ सकती है।