क्या आपको पता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके आधार कार्ड को कैसे डिएक्टिवेट किया जाता है? हाल ही में एक RTI (सूचना का अधिकार) के तहत चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। RTI के अनुसार, पिछले 14 वर्षों में केवल 1.15 करोड़ आधार कार्ड ही निष्क्रिय किए गए हैं, जबकि इस अवधि में हुई मौतों की संख्या कहीं अधिक है।
आधार कार्ड आज पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर हर जगह आवश्यक हो गया है—बैंकिंग से लेकर सरकारी योजनाओं तक। ऐसे में किसी मृत व्यक्ति का आधार एक्टिव रहना, डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का कारण बन सकता है। इसी वजह से UIDAI ने आधार रद्द करने की ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध करवाई है।
UIDAI के अनुसार, आधार कार्ड को निष्क्रिय करने में अधिकतम 90 दिन का समय लग सकता है।
UIDAI की गाइडलाइंस के अनुसार, मृतक के परिवार के सदस्य ही यह रिक्वेस्ट दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
ध्यान रहे कि यह प्रक्रिया केवल परिवार के सदस्य की ओर से ही वैध मानी जाती है।
आज की डिजिटल दुनिया में मृतक व्यक्ति का आधार निष्क्रिय करना बेहद जरूरी हो गया है। इससे न सिर्फ फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, बल्कि सरकारी डाटा भी सटीक रहेगा। UIDAI की यह सुविधा अब पूरी तरह ऑनलाइन है, जिससे यह प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन गई है।