Elon Musk Amazon Rival: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के मालिक एलन मस्क ने Amazon को टक्कर देने वाला नया प्लेटफॉर्म शुरू करने का संकेत दिया है। यह चर्चा तब शुरू हुई जब एक यूजर ने दावा किया कि Amazon अपने प्लेटफॉर्म पर मस्क के AI बॉट Grok को खरीदारी करने से रोक रहा है। इसके जवाब में मस्क ने Amazon का प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म शुरू करने का विचार सामने रखा। लेकिन अभी उन्होंने किसी नए ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
इस मामले में X पर एक यूजर ने दावा किया कि Amazon उसके Grok AI बॉट को ऑर्डर देने से रोक रहा है। यूजर ने मस्क से सवाल किया कि क्या अब X को अपना शॉपिंग प्लेटफॉर्म शुरू करना चाहिए। इस विचार को आगे बढ़ाते हुए उसने X Shop लाने का सुझाव भी दिया है।
वहीं मस्क ने इस पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा, “शायद हमें अमेज़न का एक प्रतियोगी शुरू करना चाहिए।” जिसका सीधा मतलब है कि शायद हमें Amazon का प्रतिस्पर्धी शुरू करना चाहिए। उनके इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर संभावित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
मस्क के बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि वह Amazon जैसे प्लेटफॉर्म के विकल्प पर विचार कर सकते हैं लेकिन इसे लॉन्च की पुष्टि नहीं माना जा सकता। उन्होंने अभी तक यह नहीं बताया है कि नया प्लेटफॉर्म X के अंदर ही काम करेगा या अलग वेबसाइट और ऐप के रूप में आएगा। इसके अलावा लॉन्च की तारीख, संभावित फीचर्स, प्रोडक्ट कैटेगरी और भारत में उपलब्धता को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल X Shop को एक संभावित विचार के रूप में ही देखना सही रहेगा।
इस पूरे मामले की बड़ी वजह AI एजेंट्स को लेकर ई-कॉमर्स कंपनियों की बदलती रणनीति है। AI एजेंट के बारे में बताए तो यह ऐसे डिजिटल असिस्टेंट होते हैं जो यूजर की ओर से वेबसाइट पर प्रोडक्ट खोजने और खरीदारी जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। वहीं Amazon पहले भी थर्ड-पार्टी AI एजेंट्स की वेबसाइट तक पहुंच पर आपत्ति जता चुका है। साथ ही कंपनी का कहना है कि दूसरे कारोबारों की ओर से खरीदारी करने वाले AI टूल्स को संबंधित सेवा की शर्तों और अनुमति का सम्मान करना चाहिए।
अगर भविष्य में मस्क इस विचार को हकीकत में बदलते हैं तो मुकाबला केवल प्रोडक्ट और कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें AI असिस्टेंट की मदद से प्रोडक्ट ढूंढना, विकल्पों की तुलना करना और ऑर्डर देना भी अहम हो सकता है। लेकिन ग्राहकों की सुरक्षा, भुगतान की अनुमति और निजी जानकारी की सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी बनी रहेंगी।