EU AI Act (Source. magnific) 
टेक्नॉलजी

2 अगस्त से बदल जाएगा AI का खेल, फोटो-वीडियो पर बताना होगा सच, नहीं तो लगेगा करोड़ों का जुर्माना

EU AI Act: AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक, फेक न्यूज और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ी गई हैं। इन्हीं खतरों से निपटने के लिए यूरोपियन यूनियन ने बड़ा कदम उठाया है।

सिमरन सिंह

AI Generated Content: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक, फेक न्यूज और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी तेजी से बढ़ी गई हैं। इन्हीं खतरों से निपटने के लिए यूरोपियन यूनियन (EU) ने बड़ा कदम उठाया है। 2 अगस्त 2026 से EU में AI कंटेंट को लेकर नए Transparency Rules लागू होने जा रहे हैं। इन नियमों के तहत AI से तैयार या एडिट किए गए फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट की स्पष्ट पहचान कराना अनिवार्य होगा। EU का मानना है कि इंटरनेट पर असली और AI से बने कंटेंट के बीच अंतर साफ होना चाहिए, ताकि लोग भ्रामक जानकारी और डीपफेक का आसानी से पता लगा सकें।

क्या होंगे नए नियम?

EU AI Act के अगले चरण के तहत जनरेटिव AI और इंटरएक्टिव AI सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को कई नई जिम्मेदारियां निभानी होंगी। अगर कोई यूजर AI चैटबॉट, AI एजेंट या AI अवतार से बातचीत कर रहा है, तो प्लेटफॉर्म को पहले ही बताना होगा कि सामने इंसान नहीं, बल्कि AI है। इसके अलावा AI से तैयार या बदले गए फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट में मशीन-रीडेबल डिजिटल लेबल जोड़ना अनिवार्य होगा। जनहित से जुड़ी AI-जनरेटेड खबरों या कंटेंट पर भी स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उसमें AI का इस्तेमाल हुआ है। लेकिन कलात्मक, व्यंग्य, काल्पनिक और रचनात्मक कंटेंट के लिए कुछ छूट दी गई है ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित न हो।

नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना

EU ने इन नियमों को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। यदि कोई कंपनी पारदर्शिता नियमों का पालन नहीं करती है तो उस पर 1.5 करोड़ यूरो तक या उसके वैश्विक सालाना कारोबार के 3 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि छोटे और मझोले कारोबारों के लिए कंपनी के आकार और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

भारत समेत दूसरे देशों में क्या है स्थिति?

बता दें कि AI कंटेंट को लेकर दुनिया के कई देश पहले से सक्रिय हैं। जिसमें चीन AI से बने फोटो, वीडियो और टेक्स्ट पर लेबलिंग पहले ही अनिवार्य कर चुका है। जिसमें दक्षिण कोरिया ने डीपफेक, चुनावी और अश्लील AI कंटेंट पर कड़े नियम बनाए हैं, जबकि अमेरिका के कई राज्यों में AI-जनरेटेड कंटेंट और चुनावी डीपफेक को लेकर अलग-अलग कानून लागू हैं।

वहीं भारत में फिलहाल EU जैसा अलग AI कानून नहीं है लेकिन आईटी नियम, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम 2023 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत AI से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जा रहा है। फरवरी 2026 में आईटी नियमों में संशोधन के बाद AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को डीपफेक और भ्रामक AI कंटेंट पर तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई करनी होती है।

वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि AI का इस्तेमाल जितनी तेजी से बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी होती जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में दुनिया के और देश भी इसी तरह के सख्त नियम लागू कर सकते हैं।

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