Aadhaar App (Source. Playstore) 
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मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब फोन में जबरदस्ती नहीं होगा Aadhaar App, सरकार ने लिया यू-टर्न

Aadhaar App: भारत सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य बनाने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यूजर्स की प्राइवेसी और डिवाइस सिक्योरिटी पर सवाल उठा रहा है।

सिमरन सिंह

Aadhaar Update: देश के करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य बनाने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यूजर्स की प्राइवेसी और डिवाइस सिक्योरिटी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती थी कि हर नए स्मार्टफोन में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल होकर आए, लेकिन अब इस प्लान पर ब्रेक लगा दिया गया है।

क्या था सरकार का प्लान?

साल की शुरुआत में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आईटी मंत्रालय से अनुरोध किया था कि वह स्मार्टफोन कंपनियों जैसे Apple, Google और Samsung से बातचीत करे। उद्देश्य यह था कि भारत में बिकने वाले सभी नए स्मार्टफोन्स में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल हो, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच आसान हो सके। सरकार का मानना था कि इससे यूजर्स को बार-बार ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल सरल हो जाएगा।

आधार क्यों है इतना जरूरी?

Aadhaar एक 12 अंकों की यूनिक डिजिटल पहचान है, जो फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन से जुड़ी होती है। देश में 1.34 अरब से ज्यादा लोग बैंकिंग, टेलीकॉम वेरिफिकेशन और एयरपोर्ट एंट्री जैसी कई जरूरी सेवाओं के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं। यही वजह थी कि सरकार आधार ऐप को और ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहती थी।

क्यों बदला गया फैसला?

आईटी मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की समीक्षा करने के बाद इसे वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि UIDAI ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कदम क्यों उठाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन कंपनियों के साथ चर्चा के बाद लिया गया है, जिनकी इस मुद्दे पर अहम भूमिका रही।

कंपनियों ने उठाए बड़े सवाल

स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां लंबे समय से यूजर प्राइवेसी, डिवाइस सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर कंपैटिबिलिटी को लेकर चिंता जता रही थीं। उनका कहना था कि किसी सरकारी ऐप को जबरन प्री-इंस्टॉल करने से यूजर्स की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, Apple और Samsung जैसी कंपनियों ने खास तौर पर सुरक्षा और डेटा से जुड़े जोखिमों पर सवाल उठाए थे।

पहले भी कई बार बदला गया फैसला

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का प्रस्ताव वापस लिया हो। पिछले दो वर्षों में यह छठी बार है जब स्मार्टफोन में सरकारी ऐप्स को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार कंपनियों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा।

संचार साथी ऐप का उदाहरण

दिसंबर में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब टेलीकॉम ऐप संचार साथी को कुछ समय के लिए अनिवार्य किया गया था। लेकिन कंपनियों और यूजर्स के विरोध के बाद यह फैसला भी जल्द ही वापस ले लिया गया।

क्या है इसका मतलब यूजर्स के लिए?

इस फैसले का सीधा मतलब है कि अब यूजर्स को अपने फोन में कौन सा ऐप रखना है, इसका अधिकार उन्हीं के पास रहेगा और Aadhaar को पहले से ही फोन में नहीं दिया जाएगा।

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