Threehalves Robot Is A Rescue Robot: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अनोखे रोबोट का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसको पहली नजर देखने से यह किसी साइंस-फिक्शन या हॉरर फिल्म के किरदार जैसा दिखाई देता है। जो करीब 7 फीट लंबा, चार पैरों पर चलने वाला यह रोबोट सिर पर सींग और हाथ में चलती आरी लिए नजर आता है। इसकी डरावनी बनावट को देखकर कई यूजर्स इसे शैतानी जीव तक कह रहे हैं। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। यह रोबोट इंसानों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि खतरनाक परिस्थितियों में जान बचाने के लिए तैयार किया गया है। बता दें कि कैलिफोर्निया की टेक कंपनी Satyress ने इस अनोखे रोबोट प्रोटोटाइप को Threehalves नाम दिया है। इसका उद्देश्य उन जगहों पर काम करना है जहां इंसानों के लिए जाना बेहद जोखिम भरा होता है।
आमतौर पर रेस्क्यू रोबोट इंसानों की तरह दो पैरों वाले बनाए जाते हैं लेकिन Threehalves को चार पैरों वाले सेंटॉर डिजाइन के साथ विकसित किया गया है। इससे यह उबड़-खाबड़ और कठिन रास्तों पर भी बेहतर संतुलन बनाए रख सकता है। इसके ऊपरी हिस्से में इंसानी शरीर जैसी संरचना दी गई है जिसमें जरूरत के मुताबिक बदले जा सकने वाले रोबोटिक हाथ लगाए जा सकते हैं। इन हाथों में आरी, ड्रिल मशीन और रिंच जैसे अलग-अलग टूल्स फिट किए जा सकते हैं। यही वजह है कि यह कई तरह के रेस्क्यू और तकनीकी काम कर सकता है।
वहीं रोबोट के सिर पर लगे सींग सिर्फ डिजाइन का हिस्सा नहीं हैं। इनके अंदर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं जो काम के दौरान रोबोट के हाथों और टूल्स पर लगातार नजर रखते हैं। यह रोबोट पूरी तरह ऑटोमैटिक नहीं है। इसे एक प्रशिक्षित ऑपरेटर कैमरों, सेंसर और जॉयस्टिक की मदद से सुरक्षित दूरी से कंट्रोल करेगा ठीक उसी तरह जैसे ड्रोन उड़ाया जाता है।
इसको लेकर कंपनी के संस्थापक बीयू जी. ने जानकारी दी है कि इस रोबोट का विचार उन्हें कैलिफोर्निया के टाहो नेशनल फॉरेस्ट में तूफान के बाद गिरे पेड़ों को हटाने के दौरान सामने आई चुनौतियों से मिला था। बता दें कि Threehalves का इस्तेमाल बिजली के तारों के पास खतरनाक पेड़ों को काटने, जंगल की आग के दौरान रास्ता साफ करने और भूस्खलन या ढही हुई इमारतों के मलबे में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने जैसे जोखिम भरे कार्यों में किया जाएगा।
हालांकि इसके डरावने लुक्स सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं लेकिन इसका मकसद पूरी तरह मानवीय है। बता दें कि कंपनी इस प्रोटोटाइप पर 1.25 करोड़ रुपये यानी करीब 150,000 डॉलर से अधिक खर्च कर चुकी है। लेकिन अभी के लिए इसकी लॉन्च डेट और कीमत का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।