साक्षी मलिक का 34वां जन्मदिन  (सोर्स - AI Image)
खेल

रोहतक की बेटी से रियो की दंगल गर्ल तक, जानें साक्षी मलिक के 34वें जन्मदिन पर संघर्ष की अनसुनी कहानी

Sakshi Malik Birthday: 3 सितंबर यानी आज भारत की स्टार पहलवान साक्षी मलिक का 34वां जन्मदिन है। रियो ओलंपिक में इतिहास रचने वाली साक्षी के संघर्ष और सफलता की अनसुनी कहानी जानें।

सृष्टि मौर्य

Sakshi Malik 34th Birthday Special Life Story: आज, 3 सितंबर 2026 को भारत की मशहूर फ्रीस्टाइल रेसलर साक्षी मलिक का 34वां जन्मदिन है। ओलंपिक की इस स्टार खिलाड़ी ने अपने जज्बे से भारत में महिलाओं के कॉम्बैट स्पोर्ट्स की परिभाषा बदल दी। वो अपना ये खास दिन अपने परिवार के साथ मना रही हैं।

रूढ़िवादी सोच वाले माहौल में एक साधारण से गांव में बचपन बिताने से लेकर ओलंपिक पोडियम तक पहुंचने का साक्षी का सफर, हिम्मत और पूरी लगन की एक बेहतरीन मिसाल है।

शुरुआती जीवन और परिवार

साक्षी मलिक का जन्म 3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव में हुआ था। वो एक साधारण लेकिन बहुत हौसला बढ़ाने वाले परिवार में पली-बढ़ीं। उनके पिता, सुखबीर मलिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में बस कंडक्टर के तौर पर अपनी कम्युनिटी की सेवा करते थे। उनकी मां, सुदेश मलिक एक लोकल हेल्थ क्लिनिक में सुपरवाइजर थीं।

अपने भाई के साथ बड़ी होते हुए साक्षी अपने दादाजी, बदलू राम से बहुत प्रभावित हुईं जो एक पारंपरिक पहलवान थे। बचपन में ही मिले इस अनुभव ने उस छोटी सी बच्ची के दिल में एक शानदार स्पोर्ट्स करियर का बीज बो दिया।

साक्षी मलिक के माता-पिता

साक्षी मलिक के संघर्ष का दौर

2000 के दशक की शुरुआत में हरियाणा के ग्रामीण इलाके में एक लड़की के लिए रेसलिंग मैट पर कदम रखना कोई आसान फैसला नहीं था। वहां की पारंपरिक सोच यही थी कि लड़कियां कम से कम पढ़ाई करें और घर के कामों तक ही सीमित रहें। जब साक्षी ने 12 साल की कम उम्र में रोहतक के छोटू राम स्टेडियम में कोच ईश्वर दहिया के अंडर ट्रेनिंग शुरू की, तो इस फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ।

स्थानीय लोगों ने एक लड़की को ट्रेनिंग देने के लिए उनके कोच का खुलकर विरोध किया और गांव वालों ने शॉर्ट्स पहनने और लड़कों के साथ रेसलिंग करने के लिए साक्षी पर उंगलियां उठाईं। आलोचकों ने उनके माता-पिता को चेतावनी दी कि इस मुश्किल खेल की वजह से उनके कान खराब हो सकते हैं और इससे उनकी शादी में दिक्कत आ सकती है। बिना डरे उनके माता-पिता ने उन्हें नकारात्मकता से बचाया और उन्हें मुश्कि

साक्षी मलिक

सपने का पीछा करके पा ली बड़ी कामयाबी

साक्षी का कुदरती हुनर ​​तब सामने आया जब उन्होंने 2007 में सब-जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। ग्लासगो में 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। हालांकि, उनकी जिदगी बदलने वाला पल 17 अगस्त, 2016 को रियो ओलंपिक में आया।

किर्गिस्तान की ऐसुलू टिनिबेकोवा के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में 0-5 से पीछे रहने के बावजूद, साक्षी ने आखिरी कुछ सेकंड में शानदार वापसी करते हुए 8-5 से जीत हासिल की। ​​उस ऐतिहासिक रात वो ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं और तुरंत ही राष्ट्रीय हीरो बन गईं।

साक्षी मलिक अपने पति के साथ

अखाड़े से शुरू हुआ प्यार

साक्षी की निजी जिदगी भी उनके खेल करियर जितनी ही प्रेरणादायक है। उनकी मुलाकात साथी इंटरनेशनल रेसलर सत्यव्रत कादियान से हुई जो कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट और अर्जुन अवॉर्डी सत्यवान कादियान के बेटे हैं और ये मुलाकात ग्लोबल टूर्नामेंट्स के दौरान हुई। खेल के प्रति उनके साझा जुनून ने दोस्ती और बाद में प्यार का रूप ले लिया। सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए साक्षी ने बहादुरी से अपनी पसंद को अपनाया और अप्रैल 2017 में एक शानदार समारोह में दोनों शादी के बंधन में बंध गए।

इस जोड़े ने 11 नवंबर, 2024 को अपनी प्यारी बेटी योशीदा कादियान का स्वागत करके अपने परिवार को आगे बढ़ाया। महान जापानी रेसलिंग आइकन साओरी योशिदा जो साक्षी के करियर की सबसे बड़ी प्रेरणा थीं के नाम पर रखी गई इस नन्ही बच्ची ने उनकी जिदगी में ढेर सारी खुशियां भर दी हैं। साक्षी ने बच्चे के जन्म के बाद की चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की है और शुरुआती मातृत्व की मुश्किलों का सामना उसी ईमानदारी के साथ किया है, जिसने उनके रेसलिंग करियर को पहचान दिलाई थी।

साक्षी मलिक अपनी बेटी के साथ
साक्षी मलिक

बदलाव लाने वाली हस्ती

हालांकि साक्षी ने दिसंबर 2023 में कॉम्पिटिटिव रेसलिंग से औपचारिक रूप से संन्यास ले लिया लेकिन उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। अपने करियर के दौरान, उन्होंने भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान 'खेल रत्न' (2016) प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' (2017) और बर्मिंघम में 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल किया।

हाल के वर्षों में वो एथलीटों की सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों की जबरदस्त समर्थक बन गई हैं। इस सफर का जिक्र उनकी 2024 में आई दमदार आत्मकथा 'विटनेस' में किया गया है। उनके साहसी रुख की वजह से उन्हें टाइम मैगजीन की दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में जगह मिली।

अपने 34वें जन्मदिन पर साक्षी मलिक न केवल अतीत की एक सम्मानित चैंपियन के तौर पर बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल के तौर पर भी खड़ी हैं।

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