क्रिकेट खेलते नवजोत सिंह सिद्धु सोर्स: सोशल मीडिया
क्रिकेट

जब पिता के आंसू देखकर रातों-रात बदली नवजोत सिंह सिद्धू की किस्मत, रोज 125 छक्के मारकर दुनिया को किया हैरान

Sixer Sidhu Story: अखबार की एक कटिंग ने नवजोत सिंह सिद्धू की जिंदगी बदल दी। जानिए कैसे पिता के आंसू और आलोचकों के तानों ने सिद्धू को दुनिया का सबसे धाकड़ 'सिक्सर किंग' बना दिया।

विजय कुमार तिवारी, आकाश मसने

Highlights

  • अखबार की कटिंग से बदला सिद्धू का जीवन

  • 'स्ट्रोकलेस वंडर' के ताने से 'सिक्सर किंग' का सफर

  • पिता के आंसू देखकर रोज लगाए 125 छक्के

  • 1987 वर्ल्ड कप में डेब्यू पर लगातार 4 फिफ्टी

  • नवजोत सिंह सिद्धू के वनडे और टेस्ट रिकॉर्ड

  • पिता का सपना और वेस्टइंडीज के खिलाफ फ्लॉप डेब्यू

Navjot Singh Sidhu Strokeless Wonder Story: खिलाड़ी से राजनेता और टीवी शो का प्रमुख चेहरा बने नवजोत सिंह सिद्धू 20 अक्टूबर 2026 को अपना 63वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर हम नवजोत सिंह सिद्धू के जीवन से जुड़े कुछ ऐसी बातों पर चर्चा करेंगे, जो कम लोगों को पता हैं। साथ ही आज की युवा पीढ़ी इससे अंजान है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के पिता सरदार भगवंत सिंह का सपना था कि उनका बेटा देश के लिए क्रिकेट खेले और पूरी दुनिया में नाम कमाए। पिता की इसी प्रेरणा से सिद्धू ने क्रिकेट की राह चुनी। साल 1983-84 में वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धू को भारतीय टीम में शामिल होने का मौका मिला। हालांकि, उनका यह शुरुआती प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा और वे बल्लेबाजी में कोई खास कमाल नहीं दिखा सके।

जब अखबार के पन्नों ने तोड़ा था सिद्धू का दिल

खराब प्रदर्शन के बाद जाने-माने क्रिकेट पत्रकार राजन बाला ने 'The Indian Express' अखबार में सिद्धू की आलोचना करते हुए एक आर्टिकल लिखा। उस आर्टिकल की हेडलाइन थी..'Sidhu: The Strokeless Wonder' जिसके मतलब होता है..बिना किसी शॉट या कला के खेलने वाला अजूबा।

उस समय के साथी खिलाड़ियों का कहना है कि यह किस्सा कई लोगों से नवजोत सिंह सिद्धू ने साझा किया। नवजोत सिंह सिद्धू खुद बताते थे कि जब सुबह वह अखबार तकिए के नीचे छिपा देखने के साथ-साथ अपने पिता को उस खबर को पढ़कर चुपचाप आंसू बहाते देखा, तो वे बुरी तरह टूट गए। पिता के आंसुओं ने उनके दिल को गहराई तक झकझोर कर रख दिया और वे फफक-फफक कर रो पड़े।

पिता के आंसू ने बदला सिद्धू का संकल्प

उसी रात सिद्धू ने अपने अपमान और आलोचकों के तानों को एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार करने का फैसला किया। उन्होंने ठान लिया कि वे अब खुद को साबित करके ही दम लेंगे। इसके बाद सिद्धू का कठिन संघर्ष शुरू हुआ। वे हर रोज सुबह साढ़े 3 बजे से 4 बजे के बीच उठ जाते थे। खुद पिच तैयार करते, घंटों पसीना बहाते और रोजाना कम से कम 125 से अधिक गगनचुंबी छक्के लगाने की प्रैक्टिस करते थे। अभ्यास करते-करते उनके हाथों से खून तक बहने लगता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अपने पिता भगवंत सिंह सिद्धु की गोदी में नवजोत सिद्धु व अपनी बेटी के साथ क्रिकेटर

1987 के वर्ल्ड कप में 'सिक्सर सिद्धू' बनकर की धमाकेदार वापसी

सिद्धू की यह अनवरत कड़ी मेहनत रंग लाई और 1987 के क्रिकेट विश्व कप में उन्हें दोबारा भारतीय टीम में मौका मिला। मैदान पर उतरते ही उन्होंने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। वे स्पिनरों के खिलाफ आगे बढ़कर इतने लंबे और ऊंचे छक्के लगाते थे कि लोग हैरान रह जाते थे। इस बेहतरीन प्रदर्शन के बाद वही पत्रकार राजन बाला भी उनके मुरीद हो गए और उन्होंने नया लेख लिखा था.... 'Sidhu: From Strokeless Wonder To A Palm-Grove Hitter'..फिर यहीं से दुनिया को उनका 'सिक्सर सिद्धू' वाला अवतार मिला।

डेब्यू पर लगातार 4 अर्धशतक लगाने का बनाया अनोखा विश्व रिकॉर्ड

नवजोत सिंह सिद्धू ने 1987 के वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे जैसी टीमों के खिलाफ ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की। वे वनडे क्रिकेट के इतिहास में अपने डेब्यू पर लगातार 4 अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। 1987 विश्व कप के दौरान उन्होंने खेले गए 5 में से 4 मैचों में फिफ्टी जड़ी और कुल 276 रन बनाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस धमाकेदार वापसी ने उनके सभी आलोचकों के मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिए।

ऐसे रहे हैं टेस्ट और वनडे करियर के आंकड़े

'सिक्सर सिद्धू' के नाम से मशहूर नवजोत सिंह सिद्धू का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर काफी शानदार रहा है...

टेस्ट करियर के आंकड़े

नवजोत सिंह सिद्धू ने भारत के लिए 51 टेस्ट मैचों की 78 पारियों में 3,202 रन बनाए। टेस्ट में उनका उच्चतम स्कोर 201 रन (वेस्टइंडीज के खिलाफ) रहा। इस दौरान उन्होंने 9 शतक और 15 अर्धशतक जमाए।

वनडे करियर के आंकड़े

नवजोत सिंह सिद्धू ने 136 वनडे इंटरनेशनल मैचों में 4,413 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 134 रन (इंग्लैंड के खिलाफ, ग्वालियर 1993) रहा। वनडे में उन्होंने 6 शतक और 33 अर्धशतक ठोंके।

सिद्धू का यह सफर साबित करता है कि अगर इंसान की नीयत साफ हो और मेहनत में जज्बा हो, तो आलोचनाएं ही कामयाबी की सबसे बड़ी सीढ़ी बन जाती हैं।

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