निशान वेलुपिल्लै (फोटो- सोशल मीडिया) 
खेल

20 साल का सूखा खत्म, फीफा वर्ल्ड कप में खेला भारतीय मूल का यह धाकड़ खिलाड़ी; तुर्की के खिलाफ रचा इतिहास

FIFA World Cup 2026 में Nishan Velupillay फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बन चुके हैं। इससे पहले विकास दोरासू ने फ्रांस की ओर से इस टूर्नामेंट में भाग लिया था।

संजय सिंह बिष्ट

Who is Nishan Velupillay ? हिंदुस्तान के फुटबॉल प्रेमियों के लिए ये गर्व की बात है कि भारतीय मूल के एक खिलाड़ी ने FIFA World Cup 2026 के बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। गौरतलब है कि भारतीय फुटबॉल टीम अब तक फीफा वर्ल्ड कप में अपनी जगह नहीं बना पाई हो, लेकिन निशान वेलुपिल्लै ने भारतीय मूल का खिलाड़ी बनकर कई देश को पहचान दिलाने का काम किया है। वेलुपिल्लै बीते 20 वर्षों में विश्व कप में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के फुटबॉल खिलाड़ी बन चुके हैं। उनसे पहले साल 2006 के विश्व कप में विकास एक अन्य भारतीय मूल के प्लेयर दोरासू ने फ्रांस की तरफ से इस टूर्नामेंट में खेला था।

तुर्की के खिलाफ डेब्यू करने का मिला मौका

निशान वेलुपिल्लै को FIFA World Cup 2026 में तुर्की के खिलाफ खेले गए मुकाबले में डेब्यू करने का मौका मिला। इस मुकाबले के 61वें मिनट में उन्हें टीम ने बतौर विकल्प मैदान पर उतारा। ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस मैच को 2-0 से अपने नाम कर लिया। इस जीत में गोलकीपर पैट्रिक बीच की भी अहम भूमिका रही।

तमिलनाडु से है गहरा रिश्ता

Nishan Velupillai का जन्म 7 मई 2001 को हुआ था और उनका रिश्ता मूल रूप से भारत के तमिलनाडु से जुड़ा हुआ है। वेलुपिल्लै की मां का नाम गिलियन वेलुपिल्लै है, जो कि एंग्लो-इंडियन थीं। इस खिलाड़ी की पढ़ाई-लिखाई ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर से हुई है। जिसके बाद इन्होंने फुटबॉल से खुद को जोड़ लिया। इस दौरान वो मेलबर्न में विक्ट्री यु्वा अकादमी से जुड़े। इस दौरान उन्होंने फुटबॉल में अपने पेशेवर करियर की नींव को मजबूत किया।

अपने क्लब के लिए बने अहम खिलाड़ी

वेलुपिल्लै ने साल 2021 में अपने क्लब मेलबर्न विक्ट्री के लिए सीनियर स्तर पर डेब्यू किया। जिसके बाद वो इस क्लब के लिए सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक हो गए। अब तक वेलुपिल्लै अगल-अलग प्रतियोगियाओं में क्लब के लिए खुल 146 मैच खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 25 गोल भी लगाए हैं। अपने डेब्यू के बाद वो इस क्लब के लिए प्रमुख गोल स्कोरर्स में गिने जाने लगे।

शानदार प्रदर्शन ने दिलाया राष्ट्रीय टीम में मौका

2024-25 सीजन उनके करियर का सबसे यादगार दौर साबित हुआ। ऑस्ट्रेलियन कप में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और टीम को खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही प्रदर्शन उन्हें ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम तक ले गया। उन्होंने चीन के खिलाफ विश्व कप क्वालीफायर में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और मैदान पर उतरने के कुछ ही मिनट बाद गोल दागकर अपनी छाप छोड़ दी।

हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह 2025-26 सत्र की शुरुआत में कुछ मुकाबलों से दूर रहे, लेकिन वापसी के बाद उन्होंने पांच गोल किए और चयनकर्ताओं का भरोसा जीत लिया। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया की विश्व कप टीम में जगह मिली, जहां उन्होंने इतिहास रचते हुए भारतीय मूल के खिलाड़ियों के लिए एक नई मिसाल कायम कर दी।

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