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नवभारत निशानेबाज: ट्रंप ने किया पोप का अपमान, खुद को बताया ईसा जैसा महान

Anna Hazare Movement: ईस्टर पर ट्रंप के बयान और एआई इमेज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। धर्म और राजनीति के मेल ने एक बार फिर बहस को जन्म दिया है।

अंकिता पटेल

Saddam Statue Fall Baghdad: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, अमेरिका घोषित तौर पर ईसाई या क्रिश्चियन देश है। इसके बावजूद वहां के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईस्टर के त्योहार पर ईसाइयों के धर्मगुरु पोप लियो का मजाक उड़ाया और खुद की तुलना ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट से करने का दुस्साहस किया। ट्रंप ने जीसस के रूप में अपनी एआई जनरेटेड इमेज शेयर की। इस संबंध में आपकी क्या राय है?'

हमने कहा, 'सत्ताधारियों का घमंड इसी प्रकार बढ़ जाता है। वे उन्मत्त होकर स्वयं को विलक्षण ईश्वरीय अवतार बताने लगते हैं। ट्रंप भी यही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोप लियो पहले अमेरिकी पोप हैं। यदि में व्हाइट हाउस में नहीं होता तो लियो भी वेटिकन में नहीं होते। मैं ऐसा पोप नहीं चाहता जो अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे। मुझे भारी बहुमत से जिन उद्देश्यों की वजह से चुना गया, में बिल्कुल वैसा ही कर रहा हूं। मैंने रिकार्ड स्तर तक अपराधों की तादाद गिरा दी है और इतिहास में सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बना रहा हूं।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, क्या ट्रंप कुंवारी माता मेरी व जोसेफ की संतान हैं? क्या वे चाहते हैं कि जीसस क्राइस्ट के समान उन्हें भी सूली पर लटकाया जाए? वह तो ईसा मसीह के दया, प्रेम, स्नेह, भाईचारे व इंसानियत के मार्ग पर चलने की बजाय क्रूरता, नफरत, दुश्मनी और भीषण हिंसा के शैतानी रास्ते पर चल रहे हैं। यदि उनके मन में दया और प्रेम है तो सिर्फ इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रति। कितने ही मासूम बच्चों, खियों की मौत के लिए जिम्मेदार ट्रंप खुद को ईसा मसीह जैसा बताते हैं। यह कितना बड़ा पाखंड है। वह चाहते हैं कि उनके ईरान पर हमले का पोप पूर्ण समर्थन करें, उनकी इस हरकत को देखकर कहना होगा- कौआ चला हंस की चाल। ट्रंप नोबल शांति पुरस्कार इसलिए पाना चाहते हैं क्योंकि वह दुनिया में स्मशान की शांति लाना चाहते हैं। विश्व की एकमात्र महाशक्ति अमेरिका के प्रेसीडेंट होने की वजह से ट्रंप मदमस्त हो गए हैं।'

हमने कहा, 'मंदिर के शिखर पर बैठ जाने से कौआ पक्षीराज गरुड़ नहीं बन जाता। डोनाल्ड ट्रंप हिंसा की अति कर रहे हैं। अति से बहुत नुकसान होता है। कहा गया है- अति कामा दशग्रीवः अति लोभात सुयोधनः, अति दानात हतः कर्णः अति सर्वत्र वर्जयेत। हद से ज्यादा लालसा से रावण का विनाश हुआ, दुर्योधन अपने लालच व कर्ण दान के अतिरेक में डूबा !'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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