एक रुपए का सिक्का (डिजाइन फोटो)  
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नवभारत विशेष: आखिर भारत में एक ही मूल्य के सिक्कों का अलग-अलग आकार क्यों?

वर्तमान में एक और दो रुपये मूल्यवर्ग के सिक्कों में तीन-तीन आकार मौजूद हैं, इससे आम जनता में काफी भ्रम की स्थिति बन जाती है। एक रूपये के जो सिक्के इन दिनों चलन में हैं वे 20, 22 और 25 मिमी व्यास के आकार के हैं।

मृणाल पाठक

नवभारत डेस्क: एक ही मूल्य वर्ग के सिक्कों का अलग अलग आकार, लोगों को भ्रम में डालता है। इसलिए एक मूल्य वर्ग के सिक्कों का एक ही आकार होना चाहिए। साथ ही आम लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखकर प्रत्येक बैंक शाखा में बिक्री के लिए 100 सिक्कों के छोटे पैक भी उपलब्ध होने चाहिए।

वर्तमान में एक और दो रुपये मूल्यवर्ग के सिक्कों में तीन-तीन आकार मौजूद हैं, इससे आम जनता में काफी भ्रम की स्थिति बन जाती है। एक रूपये के जो सिक्के इन दिनों चलन में हैं वे 20, 22 और 25 मिमी व्यास के आकार के हैं, जबकि दो रुपये मूल्यवर्ग के सिक्के 23, 25 और 27 मिमी व्यास के हैं। इन दोनों सिक्कों का इतना समान होना लोगों को काफ़ी भ्रम में डाल देता है।

इस भ्रम को दूर करने हेतु केंद्र सरकार को कुछ समय के लिए दो रुपये के सिक्के बनाना बंद कर देना चाहिए। वास्तव में सिक्के चाहे वे किसी भी मूल्यवर्ग के हों वे एक निश्चित वजन में ही जारी हों। इसलिए 1, 2, 5, 10 और 20 रुपए के सिक्कों का वजन क्रमशः 3, 4, 6, 8 और 10 ग्राम के आंकड़ों में तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।

20 रुपए का नोट छापना बंद करें

साल 2016 से 2019 के बीच 500 और 1000 रुपए के नोटों के विमुद्रीकरण के चलते जो नए नोट छापे गए, वे उसके पहले 1967 में छपे नोटों से आकार में छोटे थे। यदि करेंसी के आकार में बदलाव की आवश्यकता हो, तो सभी मूल्यवर्ग के नोटों में एक बार ही बदलाव किया जाय। साथ ही चूंकि 1 और 10 रुपए के नोटों की छपाई पहले ही बंद हो चुकी है, इसलिए 20 रुपए के नोटों की छपाई भी बंद कर देनी चाहिए, क्योंकि अब इस मूल्यवर्ग के सिक्के प्रचलन में आ गए हैं, जिससे 50, 100, 200 और 500 रुपए के नए छोटे आकार के नोटों के लिए रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन जनता के बीच कोई भ्रम न पैदा हो इसलिए इन अलग अलग नोटों के रंग पहले जैसे ही हों। कई देशों में प्रचलित प्लास्टिक मुद्रा सफल पाई गई है, जिससे नोटों की आयु कई गुना बढ़ गई है। प्लास्टिक के पचास रुपए के नोट प्रायोगिक आधार पर जारी किए जा सकते हैं। यदि यह विचार सफल हो जाता है, तो अन्य सभी मूल्यवर्ग के नोट प्लास्टिक मुद्रा में जारी किए जा सकते हैं। इन कदमों से लागत कम होगी।

बैंक से मिलें 100 सिक्कों के छोटे पैक

सामान्य जनता की सुविधा के लिए विभिन्न निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सभी शाखाओं और सभी डाकघरों में प्रत्येक मूल्यवर्ग के 100 सिक्कों के छोटे-छोटे पैक हमेशा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने चाहिए। बड़े पैक में 100 सिक्कों के बीस छोटे पैक हो सकते हैं, जिससे प्रत्येक मूल्यवर्ग के 2000 सिक्कों का एक समान बड़ा पैक-आकार हो सकता है। दो रुपये के अवांछित सिक्के हमेशा उपलब्ध रहते हैं, जिससे दो रुपये के सिक्कों की लोकप्रियता को बढ़ावा मिलता है।

निजी डीलरों पर प्रतिबंध लगाएं

निजी डीलरों द्वारा नए सिक्कों के बैग और प्रीमियम पर करेंसी के नए पैक बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। 6 मार्च 2015 को पुनः शुरू किए गए 1 रूपये के 100 नोटों के पैक सार्वजनिक वितरण के लिए बैंक-काउंटरों पर कभी नहीं पहुंचे, जबकि निजी डीलरों के पास भारी प्रीमियम पर ये हमेशा उपलब्ध रहे। एक रुपये के नोट पर केंद्रीय सचिव स्तर के अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं, जबकि अन्य सभी मूल्यवर्ग के नोटों पर आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए नौकरशाही द्वारा अपनी हस्ताक्षर ताकत को बरकरार रखने के लिए एक रुपये के नोट को फिर से जारी किया गया था। इसकी जांच होनी चाहिए।

चांदी मिश्र धातु का सिक्का

दस रुपये के अंकित मूल्य वाला पहला चांदी-मिश्र धातु का स्मारक सिक्का, आम जनता के लिए अंकित मूल्य पर 02।10।1969 को गांधी जन्म शताब्दी पर जारी होने की तिथि से ही उपलब्ध कराया गया था। उस समय चांदी-मिश्र धातु के सिक्के में, धातु-मूल्य अंकित मूल्य का लगभग आधा होता था। यह चलन कई वर्षों तक जारी रहा। लेकिन बाद में इस प्रथा को बदलकर अंकित मूल्य को प्रचलित धातु-मूल्य से बहुत कम कर दिया गया।

दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर 24 दिसंबर 2018 को जारी किए गए चांदी-मिश्र धातु के स्मारक सिक्के का अंकित मूल्य केवल 100 रुपये था, जबकि जारी होने के समय भी सिक्के का धातु-मूल्य अंकित मूल्य से कई गुना अधिक था। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ये सिक्के अंकित मूल्य पर जारी किए जाएं। जब भी स्मारक सिक्के जारी किए जाएं, तो वे सभी आम तौर पर प्रचलित मूल्यवर्ग जैसे एक, पांच, दस और बीस रुपये में होने चाहिए ताकि स्मारक सिक्के जारी करके भी इस अवसर को जनता द्वारा वास्तव में मनाया जा सके।

80 प्रतिशत सोने और 20 प्रतिशत चांदी वाले पांच और दस ग्राम के आधिकारिक स्मारक सोने के सिक्के, जिनकी अंकित कीमत क्रमशः 5000 और 10000 रुपये है, सीरियल नंबर के साथ आकर्षक छेड़छाड़-प्रूफ प्लास्टिक-पैक में भी जारी किए जा सकते हैं। स्मारक सिक्के-सेट की बिक्री जारी होने की तिथि से ही शुरू होनी चाहिए।

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै स्थित खंडपीठ ने 4 फरवरी 2021 को करेंसी नोटों पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की तस्वीर छापने पर विचार करने की सिफारिश की थी। अलग-अलग मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों की एक नई श्रृंखला जारी की जानी चाहिए, जिसमें प्रत्येक मूल्यवर्ग के नोट पर आजादी से पहले के एक नायक की तस्वीर होनी चाहिए, जिनकी मृत्यु आजादी से पहले हो गई हो, ताकि राजनीतिक विवादों से बचा जा सके। इसी तरह, अलग-अलग मूल्यवर्ग के आमतौर पर प्रचलित सिक्कों पर अलग-अलग गणमान्य व्यक्तियों की तस्वीरें उकेरी जा सकती हैं।

लेख- सुभाष चंद्र अग्रवाल के द्वारा

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