आईएमएफ ने क्यों दिया पाक को लोन ( सौ. डिजाइन फोटो) 
नवभारत विशेष

संपादकीय: संघर्ष जारी रहते समय आईएमएफ ने क्यों दिया पाक को लोन

आईएमएफ लोन देते समय ने कभी नहीं सोचा कि पाकिस्तान ने भारत से युद्ध छेड़ रखा है।वह इस रकम का उपयोग हमेशा की तरह आतंकवाद को तीव्र करने तथा घातक शस्त्रास्त्र खरीदी के लिए करेगा।

दीपिका पाल

नवभारत डिजिटल डेस्क: अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को 1 अरब डालर का कर्ज मंजूर किया।इसके साथ ही 1.4 अरब डालर की क्रेडिट लाइन भी स्वीकृत की।यह लोन देते समय आईएमएफ ने यह भी नहीं सोचा कि पाकिस्तान ने भारत से युद्ध छेड़ रखा है।वह इस रकम का उपयोग हमेशा की तरह आतंकवाद को तीव्र करने तथा घातक शस्त्रास्त्र खरीदी के लिए करेगा।विकास या रचनात्मक उद्देश्यों के लिए वह इस धन का इस्तेमाल न पहले करता था, न आगे करेगा।

क्या आईएमएफ में शामिल देशों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है जो पाकिस्तान की काली करतूतें उन्हें नजर नहीं आतीं? आईएमएफ का पाकिस्तान को रकम देना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।यदि कोई लापरवाह पिता अपने अय्याश और बिगड़े बेटे को मोटी रकम देता है तो उस पैसे का पूरी तरह दुरुपयोग ही होगा।वह रकम डूब जाएगी, वापस मिलने का तो सवाल ही नहीं उठता।आईएमएफ के प्रस्ताव के खिलाफ वोटिंग का प्रावधान नहीं है।या तो कोई देश प्रस्ताव के पक्ष में वोट दे अथवा अनुपस्थित रहना पसंद करे।ऐसी हालत में भारत ने बोर्ड की बैठक से दूरी बरती।

भारत ने यह बात रखी थी कि पाकिस्तान इस रकम का दुरुपयोग सीमा पार से आतंक भड़काने के लिए करेगा।पाकिस्तान ने उसे मिलनेवाली विदेशी सहायता का इस्तेमाल देश की अर्थव्यवस्था सुधारने, शिक्षा-रोजगार बढ़ाने, उद्योग धंधे खोलने या बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए कभी नहीं किया।वह इसका उपयोग अपनी फौजी तैयारियों और दहशतवाद बढ़ाने के लिए करता आया है।अपनी जनता को वह ज्यादातर गरीब, पिछड़ा हुआ और अशिक्षित रखता है।विज्ञान व तकनीक सिखाने की बजाय जिहादी बनाकर आतंक की ट्रेनिंग देता है।

इसलिए आर्थिक संकट से बचाने के नाम पर उसे दिया जानेवाला बेल आउट पैकेज कोई काम नहीं आता।भारत ने आईएमएफ को बताया कि 1989 के बाद से 36 वर्षों में 28 बार उसे आईएमएफ मोटी रकम दे चुका है।पाक को आर्थिक मदद देने के लिए आईएमएफ के पास 4 प्रोग्राम हैं।पाकिस्तान के आर्थिक मामलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी उसकी सेना की है।बेलआऊट पैकेज का बड़ा हिस्सा सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई की जेब में चला जाता है।

रकम देते समय आईएमएफ को शर्तें रखनी चाहिए और समीक्षा करनी चाहिए कि पाकिस्तान उस रकम का उपयोग किस प्रकार और किन मदों में करता है।यह बात भारत ने अपनी अध्यक्षता में हुए जी-20 सम्मेलन में कही थी कि आईएमएफ व अन्य संस्थाओं में सुधार की जरूरत है।आईएमएफ में अमेरिका का प्रभुत्व है वह पाकिस्तान को चीन से दूर रखने के लिए उसे मोटी रकम दिलवाता है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

आपको कट्टर आतंकवादी मार देंगे, चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी; मंत्रालय को मिले पत्र से हड़कंप

एमपी BJP में हलचल के बीच नितिन नवीन से मिले CM मोहन यादव; कैबिनेट विस्तार समेत कई मुद्दों पर चर्चा के कयास

जीजा और उनकी पार्टी को हराएंगे पाठक जी के साले! पारिवारिक कलह ने बढ़ाई डिप्टी सीएम की मुश्किलें

लोगों ने कोशिश की... लेकिन हमारे और योगी जी के बीच कोई दिवार नहीं, सीएम वाले बयान पर केशव प्रसाद मौर्य की सफाई

Teachers Day पर DU पहुंचेंगे PM मोदी, SRCC में छात्रों से करेंगे संवाद, 5 सितंबर को लेकर तैयारियां तेज