स्कूल में बच्चे सोर्स: सोशल मीडिया
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: खस्ताहाल स्कूल, बंद होते क्लासरूम, अब चुनाव में शिक्षा बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा?

Government School Condition In India: देश के कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति और हजारों स्कूलों के विलय पर बवाल जारी है। चुनाव से पहले विपक्षी दल शिक्षा को मुद्दा बनाने में जुटे हैं।

आकाश मसने

Education Will Become Election Issue: देश के अनेक राज्यों में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा किसी न से छिपी नहीं है। खस्ताहाल इमारतें, गिरता प्लास्टर, टूटे खिड़की-दरवाजे, बदबूदार कमरे, परिसर में कचरे का अंबार, टॉयलेट का अभाव जैसे हालात में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। यूपी, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक के वीडियो सामने आए हैं, जो शालेय शिक्षा की दुर्दशा को उजागर करते हैं। अब तक आम तौर पर चुनाव जाति, धर्म कानून व्यवस्था के मुद्दों पर लड़े जाते थे लेकिन अब लगता है कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में शिक्षा मुद्दा प्रमुखता से उभरेगा।

सपा ने शुरू किया पाठशाला पुकारें अभियान

कॉकरोच जनता पार्टी ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान चलाकर छात्रों व युवाओं से सरकारी स्कूलों का दौरा करने और वहां की विषम स्थितियों का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा है। उत्तर प्रदेश की अन्य पार्टियों ने भी इस मुद्दे में अवसर तलाशा है। सपा ने पाठशाला पुकारें अभियान शुरू किया है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसी स्कूलों के सामने विरोध प्रदर्शन किया, जो बंद कर दी गई हैं या उनका अन्य स्कूल में विलय कर दिया गया है।

स्कूल बंद होने से खड़ी हो रही नई चुनौतियां

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी पिछड़ों, दलितों व मुस्लिम वोटों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है। इन वर्गों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही एकमात्र शिक्षा का साधन है, जहां कम खर्च में पढ़ाई हो सकती है। यह लोग अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट स्कूलों में नहीं भेज सकते। यदि सरकारी स्कूल बंद हो गया अन्य स्कूल में विलीन किया गया, तो विद्यार्थियों को कई किलोमीटर दूर जाने को विवश होना पड़ता है। इससे परिवार की दिक्कतें बढ़ती हैं। मुद्दा यह है कि कितने स्कूल क्यों और किसलिए बंद या विलय किए गए? अब विद्यार्थी कहां जाएंगे? क्या शिक्षकों की कमी पर ध्यान दिया गया? क्या शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ या और गिरावट आई?

शिक्षा का मुद्दा समाज के सभी वगों को जोड़ता है

यदि शिक्षक कम हैं तो अध्यापन प्रभावित होगा। स्कूलों का बुनियादी ढांचा ठीक नहीं है। सोशल मीडिया के युग में सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल की दुर्दशा भी वीडियो से सामने आ जाती है। उसे छुपाया नहीं जा सकता। शिक्षा का मुद्दा समाज के सभी वगों को एक-दूसरे से जोड़ता है। यहां जाति और समुदाय की बात नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य का मुद्दा सामने आता है। यदि समाज की उन्नति और बदलाव चाहिए तो सरकारी स्कूलों को सुधारना होगा।

ग्रामीण शिक्षा की अवहेलना से समाज का बड़ा वर्ग पढ़ाई से वंचित रह जाएगा। ऐसा लगता है कि विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर जोर देंगे। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की पहल का उन पर भी असर पड़ सकता है। देश के अधिकतर सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। नीति आयोग व शिक्षा मंत्रालय के डाटा के अनुसार 2014-15 व 2024-25 के दौरान देशभर में 94,000 सरकारी स्कूलों को बंद किया गया या दूसरे स्कूलों में मिलाया गया यानी औसतन 25 स्कूलों के साथ रोजाना ऐसा हुआ। इस अवधि के दौरान 2।26 करोड़ छात्रों ने सरकारी स्कूलों को छोड़ा।

Brics Summit: ब्राजील के विदेश मंत्री से मिले जयशंकर, व्यापार-रक्षा और ऊर्जा पर हुई बात, सहयोग बढ़ाने पर जोर

BRICS Business Forum: पीयूष गोयल का बड़ा प्रस्ताव, ब्रिक्स देशों के पेमेंट सिस्टम को UPI से जोड़ने की अपील

ब्रिक्स को कांग्रेस में दो फाड़, शशि थरूर ने कहा यह सम्मान की बात, दिग्गजों ने विरोध में दिया था बयान

Rajasthan Nikay Chunav: वोट डालने पहुंचे दिग्गज नेता, BJP ने जीत का दावा किया तो गहलोत बोले- कांग्रेस जीतेगी

पैक्ड फूड में ज़्यादा फैट, शुगर और नमक पर सुप्रीम कोर्ट अलर्ट, FSSAI की किन योजना में कमियों पर जताई चिंता ?