नवभारत विशेष

दामाद ब्रिटेन का PM खास, राज्यसभा में पहुंची सास

चंद्रमोहन द्विवेदी

सास और दामाद के रिश्ते होते हैं खास! जब दूल्हा पहली बार शादी के लिए ससुराल पहुंचता है तो सास प्यार से उनकी नाक पकड़ती है।  अंग्रेजी में मदर-इन-ला का हिंदी अनुवाद कोई ‘कानूनी मां’ भी तो कर सकता है।  यह सचमुच खास बात है कि ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक की सास सुधा मूर्ति  (Sudha Murthy) भारत महान की राज्यसभा (Rajya Sabha) की सदस्य मनोनीत कर दी गईं।   

अब सास और दामाद दोनों पालिटिक्स में! जैसे इंग्लैंड में उच्च सदन हाउस आफ लार्डस है वैसे ही हमारे देश में राज्यसभा है।   पारिवारिक के बाद दोनों देशों के राजनीतिक संबंध भी अब बेहतरीन बनेंगे।   प्रधानमंत्री मोदी चाहे किसी भी नेता को परिवारवाद के मुद्दे पर निशाने पर लें लेकिन सास-दामाद वाला रिश्ता अपवाद है।   दोनों अलग-अलग देश में जो हैं।   हर सास चाहती है कि उसका दामाद आबाद रहे।   

मराठी में कहावत है- अक्कड सास, फक्कड जवाई। यहां ऐसा कुछ भी नहीं है क्योंकि सुधा मूर्ति एक परोपकारी (फिलेंथ्राफिस्ट) महिला होने के अलावा इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन व मशहूर लेखिका भी हैं। उन्होंने 30 किताबें लिखी हैं और उन्हें आरके नारायण पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।   शिक्षा क्षेत्र के प्रति समर्पित सुधा मूर्ति की रचनाएं स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं। उन्होंने लिखा है कि जब वह 12 वर्ष की थीं तो उनकी मां चल बसीं। 

पिता ने दूसरा विवाह कर लिया।   वह अपनी दादी के पास रहने लगीं। अपनी निरक्षर दादी को उन्होंने कन्नड़ पढ़ना-लिखना सिखाया।  तब उनके यहां एक पत्रिका आती थी जिसे पढ़कर वह दादी को सुनाया करती थीं। एक बार सुधा को किसी पारिवारिक समारोह में 2 दिनों के लिए जाना था लेकिन वहां वह एक सप्ताह तक रुक गईं। घर लौटने पर देखा कि दादी दुखी थीं क्योंकि सुधा की गैरमौजूदगी में वह पत्रिका आई थी।   दादी उसे पढ़ने में असमर्थ थीं। उन्होंने सुधा से कहा कि मुझे पढ़ना सिखा ताकि मैं पत्रिका खुद पढ़ सकूं।  सुधा ने उन्हें वर्णमाला से लेकर लिखना-पढ़ना सिखाया। 62 वर्षीय दादी ने जल्दी से सबकुछ सीख लिया और अपनी पोती को अपना गुरु माना। 

तभी से सुधा को शिक्षा प्रसार की धुन लग गई। 2 वर्ष पहले आरएसएस से जुड़ी पत्रिका पांचजन्य ने अपने एक लेख में इन्फोसिस और उसके फाउंडेशन को जिसकी सुधा मूर्ति अध्यक्ष थीं, पर जानबूझकर भारतीय अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने का आरोप लगाया था। यह लेख छपने के 3 माह बाद सुधा मूर्ति इंफोसिस के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हो गईं।   पांचजन्य की रिपोर्ट पर हंगामा मचने पर संघ ने खुद को इससे अलग कर लिया। संघ के प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने कहा कि एक भारतीय कंपनी के रूप में इन्फोसिस ने देश की प्रगति में मौलिक योगदान दिया है।  

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