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नवभारत विशेष: सोनिया गांधी की किताब पर हंगामा क्यों? पेंगुइन इंडिया विवाद और आरोपों का पूरा सच

Penguin India Controversy: सोनिया गांधी के संस्मरण 'बिलांगिंग' पर भारत में विवाद छिड़ गया है। पेंगुइन इंडिया द्वारा संशोधन के सुझाव खारिज होने के बाद इसके प्रकाशन और दबाव के आरोपों को लेकर बहस तेज है।

अनन्या तिवारी

Sonia Gandhi Book Controversy: कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी की मेमॉयर (संस्मरण) 'बिलांगिंग' पर विवाद खड़ा हो गया है। भारत में इसके प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) ने अपने हाथ खींच लिए हैं, क्योंकि उसने पुस्तक के जिन अंशों को संपादित करने का सुझाव दिया था, उन्हें कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने मानने से इनकार कर दिया था।

अशोक गहलोत ने लगाया प्रकाशन पर दबाव का आरोप

इसे 'लोकतंत्र की हत्या' कहते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है, 'पेंगुइन इंडिया पर दबाव डाला गया था कि पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस व मोदी शासन के दौरान चीन ने जो भारतीय भूमि पर कब्जा किया है, उससे संबंधित अंशों को निकाल दिया जाए।' लेकिन पेंगुइन ने सावधानीपूर्वक गठित अपने वक्तव्य में कहा है, पीआरएचआई भारत में 'बिलांगिंग' का प्रकाशक नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए नोफ जो सोनिया गांधी की पुस्तक की 1,00,000 कॉपियां प्रकाशित कर रहा है, वह भी पेंगुइन रैंडम हाउस का ही डिवीजन है।

भारत में हार्पर कॉलिंस करेगा प्रकाशित

'बिलांगिंगः ए जर्नी इन लव' के कवर पर युवा सोनिया गांधी की तस्वीर है और इस पुस्तक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 नवंबर 2026 को लॉन्च किया जाएगा। विवाद के बाद भारतीय प्रकाशकों में इस पुस्तक को प्रकाशित करने की होड़ लग गई है। अनुमान यह है कि भारत में इसे हार्पर कॉलिंस प्रकाशित करेगा।

दोहरे रवैये पर उठे सवाल

बहरहाल, सवाल यह है कि अगर पेंगुइन का ही डिवीजन नोफ बिना किसी बदलाव के पुस्तक को उसके मूल रूप में प्रकाशित करने के लिए तैयार हो गया, तो फिर पेंगुइन भारतीय संस्करण में परिवर्तन की मांग क्यों कर रहा था? क्या कहीं से कोई दबाव था कि एक पुस्तक दुनियाभर में तो छप सकती है, लेकिन भारतीय पाठक उसे संशोधित रूप में पढ़ें ? क्यों ? वैसे भी पुस्तक में लेखक के अपने विचार व अनुभव होते हैं, उसकी अपनी जिम्मेदारी होती है, उन्हें कोई प्रकाशक 'फैक्ट चेक' क्यों करना चाहता है? क्या कोई ऐसा कड़वा सच है, जिसे भारतीय जनता से छुपाने का प्रयास है?

जो सैको की पुस्तक का वितरण भी रोका

अशोक गहलोत का आरोप है कि 'मोदी सरकार प्रकाशकों पर दबाव डालकर तथ्यों को भी तोड़ना-मरोड़ना चाहती है'। ऐसा प्रतीत होता है कि पेंगुइन असहज करने वाले तथ्यों या बातों को प्रकाशित करके किसी भी सूरत में सरकार को नाराज नहीं करना चाहता। ध्यान रहे कि पेंगुइन ने इस साल के शुरू में मुजफ्फरनगर दंगों पर कार्टूनिस्ट जो सैको की पुस्तक 'द वन्स एंड फ्यूचर रायट' के वितरण को भारत में रोक दिया था।

जनरल नरवणे की किताब पर विवाद

ऐसा लग रहा है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के कंटेंट पर फरवरी 2026 में संसद में हुए जबरदस्त विवाद के बाद पेंगुइन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। 2020 के लद्दाख व गलवान सीमा विवाद से संबंधित इस पुस्तक के अंश पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए थे और पुस्तक की 'कॉपियां' भी ऑनलाइन उपलब्ध थीं, जबकि सरकार का कहना था कि जो पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई, उसका हवाला संसद में कैसे दिया जा सकता था?

व्यक्तिगत जीवन, त्रासदियों और संस्मरण का सार

पुस्तकों को प्रकाशन, वितरण से रोकना या प्रकाशक द्वारा लेखक पर पांडुलिपि में रद्दोबदल का दबाव डालना संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का घोर उल्लंघन है। सोनिया गांधी की 544 पेजों की किताब इटली के छोटे से गांव में उनकी परवरिश, कैंब्रिज में शिक्षा, राजीव गांधी से उनकी मुलाकात, रोमांस व शादी आदि को बयान करती है। यह उनकी सबसे अधिक व्यक्तिगत किताब है, जो उनके दिल से निकली हुई प्रतीत होती है। इसमें उन्होंने अपनी व्यक्तिगत त्रासदियों की भी समीक्षा की है, विशेषकर सास इंदिरा गांधी व पति राजीव गांधी की हत्याओं की।

- लेख शाहिद ए चौधरी द्वारा

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