पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, लोकतंत्र में जनता की आवाज का बड़ा महत्व है. जब जोर-शोर से आवाज उठाई जाती है तो सरकार मांगें पूरी करने के लिए बाध्य हो जाती है. संसद में भी कितने ही बिल ध्वनिमत, आवाजी मतदान या वॉइस वोट से पास कराए जाते हैं. किसी व्यक्ति की आवाज भारी तो किसी की पतली होती है. गायिकाओं की आवाज मधुर व सुरीली हुआ करती है. अमीन सयानी की मीठी आवाज की वजह से लोग बिनाका गीतमाला सुनते थे. पुरानी अभिनेत्री व गायिका नूरजहां ने गाया था- आवाज दे, कहां है, दुनिया मेरी जवां है.’’
हमने कहा, ‘‘अब शासनकर्ता विपक्ष की आवाज दबाना चाहते हैं. उन्हें असहमति का सुर बर्दाश्त नहीं है. अपना हक मांग रहे संगठनों की आवाज दबाने के लिए पंजाब पुलिस ने गजब का फार्मूला निकाला है. अफसरों से कहा गया है कि अगर किसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का विरोध हो तो ऐसे समय पर ऊंची आवाज में डीजे बजा देना ताकि नारेबाजी की आवाज सीएम तक न पहुंचे. मुख्यमंत्री की सुरक्षा देखनेवाली स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट के आईजी ने यह फरमान निकाल कर भी डीसी, पुलिस कमिश्नर और एसएसपी को भेज दिया है.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, तब तो पंजाब के डीजे वालों की चांदी हो गई होगी. जहां सीएम का प्रोग्राम, वहां डीजे भी मौजूद! किसी ने बेसिक वेतन बढ़ाने की मांग की तो डीजे बजने लगेगा- बेबी को बेस पसंद है. कहीं टाइम का ख्याल किए बगैर बजने लगेगा- चार बज गए हैं लेकिन पार्टी अभी बाकी है. एकाध जगह यह गाना बजेगा- डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दे.’’ हमने कहा, ‘‘जब पंजाब पुलिस का संदेश सार्वजनिक हो गया तो पुलिस ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि क्लेरिकल मिस्टेक हो गई हमारा आशय था कि जब कोई मुख्यमंत्री से फरियाद करे तो लाउडस्पीकर की आवाज कम कर देना ताकि सीएम उस व्यक्ति की आवाज अच्छी तरह सुन सकें.’’