पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा का नया फार्मेट खोज निकाला है। अब वह भारत ‘डोजो’ यात्रा निकालेंगे। इस तरह वह अपनी पार्टी को प्रेरणा, कर्मठता और उत्साह की नई डोज देंगे।’’ हमने कहा, ‘‘दवा की खुराक या डोज तो समझ में आती है लेकिन यह डोजो क्या है? लोगों को अब तक डीजे के बारे में जानकारी रही है। आपने रैप सांग वाले बादशाह का गाना सुना होगा- डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दे। शादी-ब्याह, जन्मदिन पर लोग डीजे का इंतजाम करवाते हैं जो अपनी फड़कती धुनों से माहौल बना देता है।’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, दवा की डोज या म्यूजिक का डीजे भूल जाइए। ‘डोजो’ को याद रखिए। यह जापानी भाषा का शब्द है। डोजो ऐसी जगह होती है जहां लोग जूडो-कराटे, कुंग फू या किसी दूसरे मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस करते हैं। बगैर हथियार के दुश्मन या प्रतिद्वंद्वी से मुकाबला करने की कला को मार्शल आर्ट कहा जाता है। केरल में कलराई पट्टू और पंजाब के सिख समुदाय में गटका नामक मार्शल आर्ट प्रसिद्ध है। आरएसएस की शाखा में ‘नियुद्ध’ नामक मार्शल आर्ट सिखाया जाता है।’’
हमने कहा, ‘‘राजनीति के अखाड़े में मार्शल आर्ट का क्या काम? वहां तो जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रीयतावाद, लुभावने वादे, मुफ्तखोरी बढ़ानेवाली खैराती योजनाएं काम आती हैं। वहां जैकी जान या अक्षयकुमार का मार्शल आर्ट नहीं चलता!’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, बीजेपी को राहुल गांधी के पैंतरे को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल ने अपने मार्शल आर्ट के वीडियो के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि किस तरह से अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल विरोधियों को परास्त करने में किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी मार्शल आर्ट के विशेषज्ञ हैं। राहुल ने मार्शल आर्ट जिउ-जित्सु की प्रैक्टिस करने का वीडियो जारी कर अपनी फिटनेस का प्रमाण दिया है। पता नहीं, इस पर मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा की क्या प्रतिक्रिया होगी!’’
हमने कहा, ‘‘जब जवाहरलाल नेहरू को ब्रिटिश शासकों ने जेल में डाल रखा था तब उन्होंने डिस्कवरी ऑफ इंडिया या भारत एक खोज नामक पुस्तक लिख डाली। यह किताब लिखते समय उनके मन में विचार आया था कि भारत के प्राचीन इतिहास, विविधतापूर्ण संस्कृति, सभ्यता के बारे में अपने दृष्टिकोण से लिखा जाए। नेहरू के मन में था- भारत को खोजो जबकि राहुल के यात्रा प्रेमी मन में है- भारत डोजो!’’
लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा