पंजाब में सीबीआई की कार्रवाई से सियासी हलचल तेज।
सुप्रीम कोर्ट से आप सरकार के अधिकारियों को राहत।
भ्रष्टाचार के मामलों में जांच जारी, गिरफ्तारी पर रोक।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी आम आदमी पार्टी की मुश्किलें।
Punjab CM Office CBI Case: दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सत्ता रहते इंडी ने नि तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आदि नेताओं पर कार्रवाई की थी। भ्रष्टाचार व तथाकथित शराब घोटाले के आरोपों की वजह से 'आप' को दिल्ली की सत्ता गंवानी पड़ी थी। यह बात अलग है कि फरवरी 2026 में विशेष सत्र न्यायालय ने केजरीवाल को बेदाग बरी कर दिया लेकिन तब तक चुनाव हो गए थे। अब पंजाब में भी भगवंत मान के नेतृत्व वाली 'आप' सरकार केंद्र व बीजेपी के निशाने पर है।
मान के कार्यालय के विशेष कार्यकारी अधिकारी सहित 5 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई करने से सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है। इससे 'आप' को कुछ राहत मिली है लेकिन अगले 6 महीने में पंजाब विधानसभा चुनाव होने वाला है। इसे लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों पर कार्रवाई की थी। इन अधिकारियों के खिलाफ तबादलों में भ्रष्टाचार, शासकीय कामकाज के वितरण में धांधली के संबंध में शिकायतें मिलने पर सीबीआई ने छापे मारे थे।
सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में सीबीआई पहुंचने के बाद पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। आम आदमी पार्टी को आशंका है कि दिल्ली के समान केंद्रीय एजेंसियां पंजाब में भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ सख्ती से दंडात्मक कार्रवाई करने से सीबीआई को रोक दिया, लेकिन दाखिल किए गए मामलों में राहत देने से इनकार किया।
पंजाब के अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बगैर गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा। वास्तव में पंजाब सरकार ने दिल्ली पुलिस कानून के अनुसार राज्य में सीबीआई जांच को मिली मंजूरी 2020 में ही रद्द कर दी थी लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के खिलाफ आरोप दायर किया था।
विधानसभा चुनाव के एक वर्ष पहले हुए स्थानीय निकाय चुनाव में 'आप' ने शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी सफलता हासिल की। इससे पंजाब में विधानसभा चुनाव जीतने का आम आदमी पार्टी का विश्वास पक्का हो गया।
भगवंत मान सरकार ने अनेक लुभावनी घोषणाएं लागू की हैं लेकिन इन लोकप्रिय योजनाओं से राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ा है तथा आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई है। राजस्व की तुलना में कर्ज का अनुपात 25 प्रतिशत रहना चाहिए, लेकिन वह बढ़कर 45 प्रतिशत हो गया है। मान सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का बीजेपी पूरा लाभ उठा रही है। यह भी संभावना है कि किसी नए प्रकरण में केंद्रीय एजेंसी भगवंत मान व उनके सहयोगियों पर कार्रवाई करें। विधानसभा चुनाव के पहले ऐसा कुछ होने की आशंका है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा