Lok Sabha Delimitation Impact ( Source: Social Media ) 
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: महिला आरक्षण व परिसीमन का लक्ष्य, 2029 चुनाव में बड़ा बदलाव

Women Reservation 2029: परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में सरकार की तैयारी तेज हो रही है। इससे लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है और 2029 के चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव संभव है।

अंकिता पटेल

Lok Sabha Delimitation Impact: संसद के इस सत्र में सरकार के सामने परिसीमन की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए महिलाओं का 33 प्रतिशत कोटा लाने का लक्ष्य है। परिसीमन से लोकसभा में सांसदों की तादाद बढ़ेगी।

जहां तक महिलाओं के कोटे की बात है, जब इसके लिए कानून पारित हुआ था तब उसे जनगणना व परिसीमन से जोड़ दिया गया था। वास्तव में लोकसभा की 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला कोटे की व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन कोई पार्टी इसके लिए तैयार नहीं दिखाई दी।

इसलिए सदस्य संख्या में वृद्धि कर उसे 816 करने का विचार किया गया। ऐसा होने पर लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा वर्तमान 272 से चढ़कर 409 तक जा सकता है।

महाराष्ट्र में लोकसभा सदस्यों की तादाद 48 से बढ़कर 72 हो जाएगी। यूपी की 80 सीटें बढ़कर 120 हो जाएंगी तथा बिहार की 40 सीटें 60 कर दी जाएंगी। ऐसे ही अन्य राज्यों में भी सीटें बढ़ेंगी।

दक्षिण के राज्यों में जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित होने से वहां कम सीटें बढ़ पाएंगी जबकि उत्तरी राज्य अधिक आबादी की वजह से बाजी मार ले जाएंगे, बीजेपी का हिंदीभाषी उत्तरी राज्यों में ही ज्यादा वर्चस्व है।

इसलिए वह परिसीमन से लाभान्वित होगी। नया संसद भवन निर्मित करते समय सदस्यों की संख्या बढ़ने का विचार किया गया था लेकिन राज्यों में वैसी व्यवस्था नहीं है। इसलिए विधानभवनों का भी विस्तार करना होगा।

अजा-अजजा के आरक्षित चुनाव क्षेत्र का गणित भी इससे बदलेगा। 2023 में संसद के विशेष सत्र में इस संबंध में विधेयक मंजूर किया गया था, जिसमें कहा गया था कि नई जनगणना के बाद चुनाव क्षेत्र की पुनः रचना होगी जिसके आधार पर महिला आरक्षण दिया जाएगा।

2021 में जनगणना नहीं हो पाई थी इसलिए अब 2011 में हुई जनगणना के आधार पर आरक्षण देने का विचार है। फिर भी ध्यान रखना होगा कि पिछले 15 वर्षों में आबादी काफी बढ़ गई है।

इस तरह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने की संभावना बढ़ गई है। इसके लिए संविधान संशोधन करना पड़ेगा। विपक्ष को सहयोग देने के लिए राजी किया जा रहा है।

लोकसभा व विधानमंडल में सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव समयानुसार सुसंगत है लेकिन लोकतंत्र में संख्यात्मक के अलावा गुणात्मक सुधार भी लाना होगा। जनता ने देखा है कि स्थानीय निकायों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण देने के बाद भी वहां महिला की बजाय उसके पति के हाथ में सत्ता रहती है जिसके लिए 'पंचायत पति' शब्द चल पड़ा है।

महिला आरक्षण देने पर भी नेताओं के परिवार की महिलाओं तक ही इसका लाभ सीमित रह सकता है। चुनाव क्षेत्र आरक्षित होने पर नेता अपनी पत्नी को निर्वाचित करवा सकता है। पार्टियां अब तक महिलाओं को उम्मीदवारी देने में इसलिए हिचकती थीं कि वह चुनकर आएंगी या नहीं! यह दृष्टिकोण अब बदलना होगा।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

तरुण तेजपाल केस: 13 साल की कानूनी जंग और बचपन का वो खौफनाक सच, पीड़िता ने पहली बार बयां किया अपना दर्द

मेरा शरीर अस्पताल में, आत्मा छात्रों के बीच… JPSC-JSSC आंदोलन के बीच देवेंद्र महतो की भावुक अपील

दिल्ली बम धमाके के पीछे अल-कायदा का हाथ, UNSC ने पेश की रिपोर्ट, कहा- बढ़ रहा है खतरा

आज की ताजा खबर 13 अगस्त LIVE: संसद का मानसून सत्र आज होगा खत्म, छात्र आंदोलन पर हो सकती है चर्चा

बेंगलुरु में FDA सख्त: स्वास्थ्य विभाग की कैंटीन में एक्सपायर्ड खाना, विधानसभा परिसर में रेंगते मिले कॉकरोच!