विदिशा के गंजबासौदा में गुटखे की पीक हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आने से 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत।
गुटखा सेवन की लत और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों पर व्यंग्य।
प्रतिबंध के बावजूद गुटखा कारोबार और तस्करी जारी रहने पर कटाक्ष।
दुबई-सिंगापुर जैसे देशों के सख्त जुर्माने से गुटखा थूकने की आदत छुड़ाने का व्यंग्यात्मक सुझाव।
Gutkha Addiction Health Risks and Smuggling: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, गुटखा सेवन स्वास्थ्य के लिए ही नहीं इंसान की जान के लिए भी हानिकारक रहता है। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के गंजबसोदा में प्रभुलाल गुप्ता नामक 65 वर्षीय व्यक्ति ने अपने घर की तीसरी मंजिल की बालकनी से गुटखे की पीक थूकी जो 11 केवी हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गई। इससे प्रभुलाल के प्राणपखेरू उड़ गए। विशेषज्ञों की राय है कि गुटखे की लार की नमी और उसमें घुला नमक पीक की पिचकारी में बिजली के वायर का करंट ले आया। इससे वह व्यक्ति बुरी तरह झुलसकर मर गया। क्या इस खौफनाक खबर को पढ़ने के बाद लोग गुटखा खाना छोड़ देंगे?'
हमने कहा, 'आप कैसी बात करते हैं? हमारे देश की अर्थव्यवस्था में गुटखा खास महत्व रखता है। पानठेले वाला रबर के पट्टे पर परिश्रमपूर्वक तंबाकू-चूने को मलता है और फिर छानकर खैनी या गुटखा तैयार करता है। उसे ग्राहक पॉलिथिन की पन्नी में प्रेमपूर्वक ले जाता है। जिसे गुटखा सेवन की लत है, वह रोज 50 या 100 रुपये का गुटखा चबा जाता है। इस तरह एक ग्राहक साल भर में 36,500 रुपये का गुटखा सेवन करता है। इस हिसाब से भारत के शहरों व गांवों में करोड़ों रुपये का गुटखा कारोबार है। महाराष्ट्र में प्रतिबंध होने पर भी ट्रैवल, बसों या अन्य तरीके से मध्य प्रदेश व पड़ोसी राज्यों से गुटखे की तस्करी होती है। गुटखा सेवन करने वाला निडर रहता है। वह माउथ कैंसर के नाम से बिल्कुल नहीं डरता। महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री आर.आर. उर्फ आबा पाटिल इसी लत की वजह से जान गंवा बैठे। दिग्गज नेता शरद पवार का मुंह आप देख ही रहे हैं।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, गुटखा खाने वाला व्यक्ति मौन व्रत धारण करता है। उससे कितनी भी बात करो वह सिर्फ हूं-हूं करेगा। जब उसका मुंह पीक से भरा हो तो उसे ब्रम्हानंद का अनुभव होता है। उसका ऑफिस चाहे जितना जुर्माना लगाए वह गुटखा सेवन नहीं छोड़ेगा। वेस्ट पेपर बास्केट में नियमपूर्वक पीक थूकता रहेगा। लखनऊ के नवाबों के पास पीकदान या उगालदान रहता था, जिसे लेकर उनका नौकर खड़ा रहता था जिसमें वह पान-तंबाकू की पीक थूकते थे! गुटखे की लत का कोई इलाज नहीं है।'
हमने कहा, 'ऐसे गुटखाप्रेमी को सरकार एक सप्ताह के लिए दुबई या सिंगापुर भेज दे तो वहां लगने वाले भारी जुर्माने और सजा से घबराकर थूकने की हिम्मत नहीं करेगा। यह है गुटखा छुड़ाने का नुस्खा!'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा