Ajit Pawar Family Politics ( Source: Social Media ) 
नवभारत विशेष

नवभारत संपादकीय: अजित पवार के निधन के बाद पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई

NCP Leadership Crisis: अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है। सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने और पार्टी नेतृत्व को लेकर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।

अंकिता पटेल

 Ajit Pawar Family Politics: जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एकजुट थी, तब शरद पवार को शीर्ष पर रखकर अजित पवार पार्टी चलाया करते थे। उनके सामने बोलने की पार्टी के किसी नेता की हिम्मत नहीं थी।

अजित पवार के निधन के बाद पार्टी की संपूर्ण निर्णय प्रक्रिया उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार व पुत्र पार्थ के हाथों में आ गई है। शरद पवार के कब्जे में पार्टी न चली जाए इसलिए अजीत दादा के निधन के तीसरे दिन ही सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।

इसके लिए प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे व राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल ने पहल की। शपथ समारोह शाम को हुआ लेकिन उसी दिन दोपहर में विधानमंडल में पार्टी नेता पद के रूप में सुनेत्रा पवार को निर्वाचित करने के लिए विधायकों की बैठक बुलाने में तटकरे व पटेल आगे थे।

तब विधायकों को लगा कि कहीं यह नेता पार्टी को हाईजैक तो नहीं कर रहे हैं। तटकरे व पटेल सुनेत्रा पवार को साथ लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भेंट करने पहुंचे तब तक विधायकों ने इस आशय का पत्र तैयार कर लिया कि सुनेत्रा को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाए, तटकरे व पटेल के खिलाफ यहीं से अविश्वास का बीज पनपा।

इसमें विलीनीकरण के मुद्दे ने खाद-पानी डाल दिया। पार्टी के अनेक मंत्री व विधायक विलीनीकरण के पक्ष में बोलने लगे तो तटकरे व पटेल ने कहा कि ऐसा कुछ भी तय नहीं हुआ है। इसी बीच बीजेपी ने कहा कि हमसे चर्चा किए बगैर विलीनीकरण नहीं होगा।

इस पर तटकरे व पटेल मौन रहे। उन्होंने यह नहीं कहा कि यह हमारी पार्टी का अंदरूनी मामला है। इससे यह चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी को अब बीजेपी अपने इशारों पर चला रही है।

अजित पवार के निधन के बाद तटकरे व पटेल ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था कि पार्टी के कार्याध्यक्ष प्रफुल पटेल को निर्णय लेने का सर्वाधिकार दिया गया है।

परंतु अब सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि अजित पवार के निधन के बाद से पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के साथ किया गया कोई भी पत्रव्यवहार अवैध माना जाए, इसका अर्थ है कि चुनाव आयोग तटकरे व पटेल के पत्र को वैध न माने।

पार्टी के भीतर ऐसा अविश्वास का माहौल रहते पाखंडी बाबा अशोक खरात प्रकरण में पार्टी की नेता रूपाली चाकणकर का नाम आगे आने से पार्टी की प्रतिष्ठा पर आंच आई।

पार्टी ने कार्रवाई करने में विलंब किया। इससे पार्टी की कमजोरी नजर आई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चाकणकर को महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा।

महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से रूपाली वाकणकर को हटाने का निर्णय लेने में 4 दिन लग गए, इससे सवाल उठता है क्या कोई सुनेत्रा पवार को निर्णय लेने से रोक रहा है? संदेह तटकरे व पटेल को लेकर है।

रायगड़ जिले के एक कार्यक्रम में लगे बैनर पर पवार परिवार के एक भी सदस्य की तस्वीर नहीं थी। यह बात तटकरे के संबंध में अविश्वास बढ़ाने वाली है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

भारत की मेजबानी में 12वीं BRICS बैठक, दिल्ली में जुटे सदस्य देश, क्लाइमेट चेंज से निपटने का बनेगा एक्शन प्लान

Farmers Protest: दिल्ली कूच पर निकले किसान, खनौरी बॉर्डर सील; सड़क पर पत्थर-कंटेनर लगाकर रोका रास्ता- VIDEO

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या

बहुत हो गया गांधीवादी... रांची में छात्रों ने अपनाया आक्रामक रूख, बोले- जितनी जिम्मेदार JMM, उतनी ही कांग्रेस

अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि: अजातशत्रु की याद में भावुक हुआ देश, पीएम मोदी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि