नंदन नीलकेणी ने परीक्षा के दिन एआई से प्रश्नपत्र तैयार करने का सुझाव दिया।
प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए क्वेश्चन बैंक और एन्क्रिप्शन पर जोर दिया।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा से रटने के बजाय विश्लेषण क्षमता और तर्कशक्ति परखने की बात कही।
नई व्यवस्था के लिए सुरक्षित तकनीक, मजबूत नेटवर्क और समान कठिनाई स्तर की चुनौती होगी।
Nandan Nilekani Exam Reform Proposal: यूआईडीआईए के पूर्व अध्यक्ष व इन्फोसिस के सहसंस्थापक नंदन नीलकेणी ने देश की परीक्षा प्रणाली में आमूल बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रतियोगी परीक्षा में पेपरफूट तथा अन्य धांधली से परीक्षार्थियों में भारी असंतोष है। इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन भी हुए हैं। इसे देखते हुए नीलकेणी का सुझाव है कि परीक्षा के दिन ही एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से प्रश्नपत्र तैयार किया जाए।
ऐसा करने पर पेपरफूट पेपरफूट नहीं हो सकेगी। केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए जो समिति गठित की है उसके प्रमुख नीलकेणी हैं। उनका यह कथन महत्वपूर्ण है कि प्रश्नों का एक बड़ा संग्रह (क्वेश्चन बैंक) बनाकर परीक्षा के दिन एकदम अंतिम क्षण पेपर तैयार किया जाए। ऐसा करने से पेपर लीक होने या उसे बेचने की कोई गुंजाइश ही नहीं रह जाएगी।
समस्या हल करने का यही उपाय है। इसके बाद ही सभी परीक्षाओं की कंप्यूटर से जांच का भी सुझाव है जिसे सीबीटी या कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट कहते हैं। इसके लिए व्यापक व्यवस्था करनी होगी। परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनिट पूर्व प्रश्नपत्र कूटबद्ध (एनक्रिप्टेड) रूप से परीक्षा केंद्र भेजने, उसे खोलने के लिए बहुस्तरीय प्रमाणीकरण व समय सीमा रखने की व्यवस्था करनी होगी।
इससे पेपर लीक का खतरा टल जाएगा। नीलकेणी के अनुसार प्रत्येक परीक्षा के लिए एक ही प्रश्नपत्र तैयार करने की बजाय विषयवार प्रश्नसंच या क्वेश्चन बैंक बनाना होगा। इस तरह की परीक्षा पद्धति में विद्यार्थी को रटने और संभावित प्रश्न खोजने की बजाय अपनी कॉन्सेप्ट या संकल्पना मजबूत करनी होगी। उसकी स्मरणशक्ति की बजाय विश्लेषण क्षमता व समस्या निवारण की कुशलता का मूल्यांकन होगा।
इस प्रणाली को लेकर कुछ चुनौतियां भी हैं जैसे कि प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर अचूक व विश्वसनीय होना चाहिए ताकि प्रत्येक प्रश्नपत्र का स्तर समान रहे। कोई बहुत आसान या बहुत जटिल न होने पाए। लाखों प्रश्नों का यह बैंक साइबर अटैक से सुरक्षित रखने के लिए मजबूत एनक्रिप्शन व नियंत्रित प्रवेश प्रणाली आवश्यक है। लाखों परीक्षार्थियों को एक ही समय प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए तेज गति वाला सर्वर, नेटवर्क तथा निर्बाध विद्युतपूर्ति वाले परीक्षा केंद्र देश भर में बनाने होंगे।
केवल उत्तर जांचने की बजाय विद्यार्थी की तर्कक्षमता की जांच करने वाले प्रश्न तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञों को निरंतर परिश्रम करना होगा। इसके लिए उचित नियोजन व इच्छाशक्ति की जरूरत होगी। देश की भावी पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल होगी। नीलकेणी को विश्वास है कि सरकार उनके सुझाव स्वीकार करेगी।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा