Modi Opposition Women Bill Remark: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, प्राचीन काल में तपस्वी ऋषि-मुनि क्रोधित होने पर शाप दे दिया करते थे। अब केदारनाथ की गुफा और कन्याकुमारी में ध्यान लगाकर तपस्या कर चुके प्रधानमंत्री मोदी ने भी पापियों को पहचानकर उन्हें शाप दिया है। उन्होंने कहा कि जिन विपक्षी दलों ने नारी शक्ति वंदन बिल को संसद में गिराया है उन्हें उनके इस महापाप के लिए महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।'
हमने कहा, 'इस भयानक शाप से तृणमूल कांग्रेस तिनके के समान बिखर जाएगी। मोदी के सामने क्षमायाचना करते हुए ममता बनर्जी त्राहिमाम कहते हुए साष्टांग दंडवत करने लगेंगी। पौराणिक युग में जिसे शाप दिया जाता था, वह पत्ते की तरह कांपने लगता था। बड़े-बड़े राजा-महाराजा भी ऋषि मुनियों के शाप से डरते थे। उनके दरबार में आते ही हाथ जोड़कर खड़े हो जाते थे और उनके धूल भरे चरणों को धोते थे।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, आप सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर की बातें कर रहे हैं। कलियुग में किसी का दिया हुआ शाप असर नहीं करता, इसलिए विपक्ष और खास तौर पर ममता बनर्जी को डरने की जरूरत नहीं है।'
हमने कहा, 'ममता तो पहले ही फीयरलेस हैं। वह मोदी, शाह और बीजेपी के बड़े नेताओं को बाहरी लोग कहती हैं। उनका सवाल है- मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है?'
हमने कहा, 'यदि पौराणिक काल की बात की जाए तो शाप देने के मामले में दुर्वासा नंबर वन थे। एक बार उन्होंने सुगंधित पुष्पों की माला देवराज इंद्र को दी। इंद्र ने माला स्वयं न पहनकर अपने ऐरावत हाथी को पहना दी। हाथी ने सूंड से माला उतारकर अपने पैरों से कुचल डाली। इस अपमान से क्रोधित होकर दुर्वासा ने इंद्र को शाप दे डाला। इसी तरह गौतम मुनि ने भी अपनी पत्नी अहिल्या का छल से विनयभंग करने पर इंद्र और उसके सहयोगी चंद्रमा को शाप दिया था। दुर्वासा का इतना दबदबा था कि उन्होंने श्रीकृष्ण व रुक्मिणी से अपना रथ खिंचवाया था और अपनी जूठी खिचड़ी श्रीकृष्ण के बदन पर चुपड़ दी थी। उर्वशी नामक अप्सरा का प्रणय निवेदन अर्जुन ने ठुकरा दिया था तो उर्वशी ने उन्हें 1 वर्ष के लिए पुरुषत्वहीन बृहन्नला बन जाने का शाप दिया था।'
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पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, राजनीति में मतलब पूरा नहीं होने पर नेता अपने विरोधियों को कोसा-सरापा करते हैं लेकिन किसी का कुछ भी नहीं बिगड़ता। इतना जरूर है कि किसी गरीब की बददुआ नहीं लेनी चाहिए क्योंकि संत कबीर ने कहा था कबहू न सताइए गरीब को, जाकी मोटी हाय, मुए चाम की आह से लोह भस्म हुई जाए। इसका अर्थ है किसी गरीब को मत सताओ। लोहार की धौंकनी में मरे हुए पशु के चमड़े की हवा से आंच भड़कती है और लोहा भी भस्म हो जाता है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा