Solar Energy Grid Support Charge: जब गुजरात में 7.87 रुपए प्रति यूनिट बिजली मिल सकती है तो महाराष्ट्र में 8.19 रुपए की दर क्यों वसूली जाए! यह 32 पैसे प्रति यूनिट का फर्क क्या कम नहीं किया जा सकता? खासकर ऐसी स्थिति में जब कितने ही लोग सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करने के लिए प्रवृत्त हो रहे हैं और उनकी अतिरिक्त बिजली वापस ग्रिड में जा रही है। सोलर एनर्जी को और बढ़ावा दिया जाना चाहिए, अभी विभिन्न मदों, टैक्स व अन्य चार्जेस मिलाकर बिजली बिल काफी हो जाता है।
गर्मी के मौसम में बिजली की खपत हर साल बढ़ती है लेकिन इस बार ग्रीष्म काल लंबा चला और उमस की वजह से फैन व कूलर का उपयोग ज्यादा करना पड़ा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वस्त किया है कि 2 वर्ष में महाराष्ट्र की जनता को गुजरात की तुलना में सस्ती बिजली मिलेगी। लोगों से आवाहन किया जाता है कि वह सोलर में इन्वेस्ट करें किंतु साथ ही सरकार उस पर ग्रिड सपोर्ट चार्ज भी लगाती है। बिजली सस्ती करने के लिए इस मुद्दे पर ध्यान देना आवश्यक है।
महाराष्ट्र देश का प्रमुख विकासशील राज्य है जहां कृषि और उद्योगों के विकास के लिए विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देना होगा। इसके लिए प्रदूषण फैलाने वाले कोयला आधारित बिजलीघरों की बजाय क्लीन एनर्जी देने वाले संयंत्र लगाने होंगे जिनमें सौर ऊर्जा के अलावा परमाणु बिजली घरों का भी समावेश हो सकता है। नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता देनी होगी।
विदर्भ में निर्मित बिजली से पश्चिम महाराष्ट्र के शहर जगमगाते हैं और उद्योग चलाते हैं लेकिन औष्णिक बिजलीघरों से क्षेत्र का तापमान बहुत बढ़ जाता है। चंद्रपुर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इसलिए यदि नए बिजलीघर लगाने हों तो पश्चिम महाराष्ट्र में लगाए जाएं। विदर्भ में बिजली निर्माण होने के बावजूद यहां के लोगों को ट्रांसमिशन में होनेवाले नुकसान का चार्ज देना पड़ता है।
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निश्चित रूप से राज्य में बिजली की मांग बढ़ी है। इसकी वजह सिर्फ औद्योगिकरण नहीं है बल्कि नई बस्तियों का निर्माण व बढ़ता शहरीकरण है। मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में नए कनेक्शन लगते हैं। इसके अलावा व्यापारिक केंद्रों का भी विस्तार हुआ है जिससे बिजली के उपभोग में वृद्धि हुई है।
ट्रांसमिशन लॉस के अलावा एक बड़ी समस्या बिजली चोरी की भी है। इसे रोकने के लिए दंडात्मक उपायों का अवलंबन किया जाना चाहिए। कितनी ही बस्तियां ऐसी हैं जहां लोग बिजली चोरी से बाज नहीं आते। इसका नतीजा ईमानदार उपभोक्ताओं को अधिक बिल देकर भुगतना पड़ता है। इसमें कोई शक नहीं कि आज के जमाने में लोग बिजली के बगैर रह नहीं सकते। जरा देर भी बिजली गुल हो जाए तो बेचैनी बढ़ जाती है। कंप्यूटर, टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी, रसोई के उपकरणों में बिजली लगती है। सरकार के प्रयास होने चाहिए कि मुनासिब दरों पर विद्युत आपूर्ति की जाए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेद्वी के द्वारा