ईरान में जनआंदोलन (डिजाइन फोटो) 
नवभारत विशेष

संपादकीय: 72% महंगाई और 544 मौतें, ईरान में अमेरिका की दखलंदाजी के आसार

Iran Protest: ईरान में रिकॉर्ड महंगाई व आर्थिक संकट के चलते जनआंदोलन तेज हो गया। खाद्यान्न व स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, सरकारी दमन और विदेशी दबाव से खामेनेई शासन पर संकट गहरा गया है।

आकाश मसने

Iran Economic Crisis: ईरान में विकट आर्थिक परिस्थिति के कारण लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। खाद्यान्न के दाम 72 प्रतिशत बढ़ गए हैं तथा स्वास्थ्य सेवाओं की दर में एक माह में 50 फीसदी वृद्धि हो गई है। डॉलर की तुलना में ईरान की मुद्रा रियाल बुरी तरह गिर गई है। भारी महंगाई से जनअसंतोष बहुत बढ़ गया है। व्यापार खतरे में आ गया व लोगों की क्रयशक्ति पर विपरीत असर पड़ा है। आर्थिक संकट और महंगाई के विरोध में 5 दिनों से प्रदर्शन जारी है। वहां सरकारी दमन में 544 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।

आरोप है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड भीड़ में शामिल होकर प्रदर्शनकारियों को छुरा घोंप रहे हैं। राजधानी तेहरान के अलावा इस्फहान, याझद और झांझन जैसे शहरों में युवा वर्ग आंदोलन कर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अल अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान में सिर्फ सरकार ही नहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड व धार्मिक संस्था का भी नियंत्रण है। बार-बार आरोप लगाया जा रहा है कि ईरान की अर्थव्यवस्था को अमेरिका नुकसान पहुंचा रहा है। उसने तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है।

क्या है अमेरिकी नेताओं के इरादें?

ट्रंप और जॉन बोल्टन जैसे अमेरिकी नेताओं ने ईरान में सत्ता बदलने का इरादा जाहिर किया है। 2020 में ईरानी नेता कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ट्रंप ने कहा था कि यदि अमेरिका से युद्ध हुआ तो ईरान पूरी तरह तबाह हो जाएगा। 1979 में इस्लामिक क्रांति के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईरान के दिवंगत शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र के समर्थन में नारे लगाए थे जो अमेरिका में निर्वासित जीवन बिता रहा है।

अमेरिका ने किया वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण कर वहां के तेल पर कब्जा करनेवाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक हौसले काफी बढ़ गए हैं। उन्होंने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। ट्रंप ने धमकी दी है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों से ज्यादती की गई तो वह ईरान पर हमला बोल देंगे। आधी शताब्दी पूर्व हुई ईरानी क्रांति ने अमेरिका समर्थिक पहलवी वंश के शासन को उखाड़ फेंका था। अमेरिका ईरान में व्याप्त जनअसंतोष का फायदा उठाना चाहता है।

गत वर्ष जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक युद्ध हुआ था जिसमें ईरान की सैनिक कमजोरी सामने आ गई थी परंतु फिर भी वहां खामेनेई की सत्ता पर पकड़ मजबूत बनी रही। इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ प्रदर्शनकारी जान, जिंदगी और आजादी के नारे लगा रहे हैं। इसका आशय महिलाओं, जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा से है। यह नारा भी लग रहा है ना गाजा, ना लेबनान, ईरान के लिए जान कुरबान!

ईरान में इंटरनेट हुआ बंद

ईरान में इंटरनेट बंद कर दिया गया है ताकि आंदोलनकारी संपर्क न कर सकें। ऐसे आसार हैं कि अमेरिका सैनिक हस्तक्षेप कर खामेनेई शासन को पलटने की कोशिश करेगा। यदि ईरान में अस्थिरता फैल जाती है तो यह इजराइल के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि ईरानी आतंकी गुट हिजबुल्ला से इजराइल का टकराव बना हुआ है।

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