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नवभारत विशेष: UPI की ग्लोबल उड़ान, भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति पहुंची 11 देशों तक

India UPI Payments: भारत में डिजिटल भुगतान ने नई ऊंचाई हासिल की है। यूपीआई से रोजाना करोड़ों लेन-देन हो रहे हैं और जनधन, आधार व मोबाइल की त्रिमूर्ति ने इस डिजिटल क्रांति को गांव-गांव तक पहुंचाया है।

अंकिता पटेल

India Digital Payment Growth: आज समूची दुनिया में डिजिटल भुगतान के जितने लेन-देन हो रहे हैं, उसमें आधे के करीब अकेले भारत में हो रहे हैं। भारत के उपभोक्ता समाज का करीब हर तबका और देश के महानगरों से लेकर गांव-गांव तक खरीदारी अब नकद लेन-देन के बजाय मोबाइल के विभिन्न यूपीआई एप के जरिए हो रही है। भारत में सभी तरह के लेन-देन का करीब 85 फीसद हिस्सा डिजिटल तरीके से हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने तो भारत को सबसे त्वरित डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का लीडर घोषित कर दिया है। भारत में औसतन 66 करोड़ डिजिटल लेन-देन रोजाना दर्ज हो रहे हैं। पिछले जून महीने में देश में 18.39 अरब यूपीआई लेन-देन के मामले दर्ज हुए, जिसके जरिए 24 लाख करोड़ रुपये की राशि का विनिमय हुआ।

UPI का वैश्विक विस्तार, 11 देशों तक पहुंचा नेटवर्क

भारत की यूपीआई भुगतान व्यवस्था का स्वरूप तो अब वैश्विक आकार ले रहा है, जो दुनिया के करीब 11 देशों में अपने पैर पसार चुका है। इनमे फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं। कहना न होगा कि भारत में डिजिटल भुगतान को देशव्यापी और जनव्यापी बनाने में विगत में शुरू की गई वित्तीय समावेशी जनधन योजना का भी बड़ा हाथ रहा है। जनधन योजना की वजह से देश में पिछले एक दशक में खुले करीब 60 करोड़ नए बैंक खातों ने भी इसमें बड़ी भूमिका अदा की है। पिछले दो दशक में भारत में घटित मोबाइल क्रांति और देशव्यापी आधार कार्ड के पहचान के साथ जनधन खातों के त्रिकोण ने इस बड़ी क्रांति को अंजाम दिया है।

देश में डिजिटल भुगतान को पनपने में भारत की वित्तीय आधारभूत संरचना यानी बैंकों की भी बड़ी भूमिका रही है। इस पूरी डिजिटल भुगतान व्यवस्था में देश के करीब 700 बैंक आपस में साझेदार के तौर पर वित्तीय तकनीकों का इस्तेमाल कर थर्ड पार्टी एप के साथ मिलकर कार्यरत रहते हैं। भारत में डिजिटल भुगतान का जो नेटवर्क है, उसे आईएमपीएस यानी इमीडिएट पेमेंट सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम से जाना जाता है, जिसकी नियामक संस्था एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) है।

UPI पर टैक्स से डिजिटल पेमेंट की रफ्तार पर संकट

डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने और इसके प्रयुक्तकर्ताओं को प्रशिक्षित करने में भारत सरकार की भूमिका भी सराहनीय रही है। पहले रेल टिकट से लेकर तमाम तरह की बुकिंग में डिजिटल भुगतान के जरिए छूट और प्रोत्साहन दिए जाते थे, लेकिन इसके बाद यह देखा गया कि रेल टिकट से लेकर कई तरह की ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान में अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। अभी देश में चर्चा इस बात की भी चली है कि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। अर्थव्यवस्था में जिस मद में कारोबार का दायरा और लेन-देन का चलन बढ़ता है, सरकार के राजस्व सलाहकार उस पर राजस्व उगाही की संभावना टटोलने लगते हैं।

स्टॉक मार्केट की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा तो सरकार सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स यानी एसटीटी और कैपिटल गेन टैक्स की अवधारणा लेकर आई। मगर यूपीआई पर किसी तरह के टैक्स लगाने की अवधारणा सरकार यदि लेकर आती है, तो यह भारत में डिजिटल भुगतान की गतिशीलता को बाधित करेगा। भारत में डिजिटल भुगतान की प्रगति के साथ डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार देखे जा रहे हैं। लोगों से इस डिजिटल अरेस्ट के जरिए करीब 4 हजार करोड़ रुपये साइबर अपराधियों ने ठग लिए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसे लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

ऐसा कदम न उठाया जाए

स्टॉक मार्केट की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा तो सरकार सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स यानी एसटीटी और कैपिटल गेन टैक्स की अवधारणा लेकर आई। मगर यूपीआई पर किसी तरह के टैक्स लगाने की अवधारणा सरकार यदि लेकर आती है, तो यह भारत में डिजिटल भुगतान की गतिशीलता को बाधित करेगा।

लेख- मनोहर मनोज के द्वारा

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