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इल्कर की जानकारी लिए बगैर, टाटा ने नियुक्ति का फैसला कैसे लिया

नवभारत डेस्क

तुर्की एयरलाइंस के पूर्व चेयरमैन इल्कर आयसी ने एयर इंडिया का सीईओ व प्रबंध निदेशक बनने से इनकार करते हुए टाटा का ऑफर ठुकरा दिया. आयसी ने कहा कि मेरी नियुक्ति की घोषणा के बाद से मैं भारतीय मीडिया के एक वर्ग में आ रही खबरों को ध्यान से देख रहा था. मुझ पर कई तरह के आरोप लगाए जा रहे थे. हाल ही में टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के साथ बैठक में मैंने बता दिया था कि इस ऑफर को स्वीकार नहीं करूंगा.

मैंने भारी मन से यह फैसला किया है. वस्तुत: इल्कर आयसी को एयर इंडिया का सीईओ बनाने के फैसले पर आरएसएस की आपत्ति थी. संघ से संबंधित स्वदेशी जागरण मंच ने कहा था कि सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयसी को सीईओ नियुक्त करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. आरएसएस को इल्कर आयसी के तुर्की से संबंधों पर एतराज था. जब तुर्की के भारत विरोधी राष्ट्रपति रेचप तैयप एद्रोआन इस्तांबुल के मेयर थे, तब इल्कर आयसी उनके सलाहकार थे. राष्ट्र की सुरक्षा के लिहाज से संघ इस विदेशी की एयर इंडिया सीईओ के पद पर नियुक्ति के खिलाफ था.

गत वर्ष अक्टूबर में टाटा ने सबसे बड़ी बोली लगाकर 2.4 अरब डॉलर (लगभग 1.80 खरब रुपए) में एयर इंडिया को खरीद लिया था. गत 14 फरवरी को टाटा ने इल्कर आयसी की नियुक्ति का ऐलान किया था. पता नहीं टाटा ने एक विदेशी को यह पद देने का फैसला क्यों किया? इल्कर आयसी को शायद इसलिए योग्य माना गया था क्योंकि 2016 में तुर्की में तख्तापलट और फिर कोरोना महामारी के दौरान भी तुर्की की एयरलाइन ने अपने किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला था और सरकारी मदद भी नहीं मांगी थी. 

आयसी टाटा के साथ दीर्घकाल तक काम करने को भी तैयार थे. टाटा ग्रुप ने नागरी उड्डयन मंत्रालय को इल्कर आयसी की नियुक्ति का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेज दिया था. यह फाइल विदेश मंत्रालय के पास सुरक्षा कारणों से भेजी गई क्योंकि यह एक विदेशी की नियुक्ति का मामला था. इसी दौरान आयसी ने एयर इंडिया में पद स्वीकार करने से मना कर दिया.

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