6 महीने में कितना महंगा हुआ मिडिल क्लास का किचन? (सोर्स- AI जेनरेटेड इमेज)
नवभारत विशेष

Explainer: गैस, दाल-तेल से दूध तक... 6 महीने में कितना महंगा हुआ मिडिल क्लास का किचन?

Food Inflation in India: पिछले छह महीनों में टमाटर, प्याज और दूध जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से मिडिल क्लास का बजट बिगड़ा। जानें कैसे खाद्य महंगाई घरेलू खर्चों पर डाल रहा असर।

मनोज आर्या

Highlights:

  • पिछले छह महीनों में दौरान टमाटर, आलू और प्याज की कीमतों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है।

  • आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई बढ़ने से महीने की राशन बिल में 8-15% की बढ़ोतरी हुई।

  • मार्च में वेज थाली की औसत कीमत 26.5 रुपये थी, जो सितंबर में बढ़कर 30.80 रुपये हो गई।

How Food Inflation Raised Explained: गैस, दाल-तेल से लेकर दूध और चीनी की कीमतों ने मिडिल क्लास के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। सरकारी और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई में हुए इजाफे के कारण महीने की राशन बिल में लगभग 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जो कि एक मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर सीधा असर डालता है।

पिछले छह महीनों में दौरान टमाटर, आलू और प्याज की कीमतों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल महीने के दौरान जहां प्याज 20 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जो अब 70 से 80 रुपये प्रति किलो हो गया है। अप्रैल से अक्टूबर तक खाने-पीने की चीजों के कीमते कितनी महंगी हुईं।? आइए इस एक्सप्लेनर में जानते हैं।

देश में लगातार क्यों बढ़ रही महंगाई?

बेमौसम बारिश और खरीफ फसलों में देरी के कारण प्याज, टमाटर और अन्य हरी सब्जियों की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे स्थानीय बाजारों में इनकी कीमतें अचानक बढ़ गईं। वहीं, ट्रांसपोर्ट खर्च में बढ़ोतरी की वजह से मंडियों तक सामान पहुंचाने का भाड़ा महंगा हुआ, जिसका असर अंतिम उपभोक्ता पर पड़ा।

2026 में कितनी रही खुदरा महंगाई?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों जैसे कि आयातित पाम ऑयल और सोयाबीन तेल पर वैश्विक कीमतों और आयात शुल्क के उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय किचन पर पड़ा। इसके अलावा पशु चारे की बढ़ी हुई कीमतों के कारण डेयरी कंपनियों को दूध की कीमतों में ₹2 से ₹4 प्रति लीटर तक का इजाफा करना पड़ा।

छह महीने में कितने बढ़े गैस के दाम?

आम उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में अप्रैल 2026 से अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर लगभग ₹913 से ₹942 के आसपास स्थिर बना हुआ है। लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में अप्रैल 2026 की शुरुआत में भारी बढ़ोतरी (लगभग ₹195.50 से ₹218 तक) दर्ज की गई थी।

इसके बाद जुलाई 2026 में इसमें कुछ राहत मिली थी जब दाम कम हुए थे, लेकिन 1 अक्टूबर 2026 से फिर से इसमें ₹62.50 से लेकर ₹71.50 तक की बढ़ोतरी कर दी गई है।

₹9 प्रति लीटर महंगा हुआ दूध

अप्रैल 2026 से अब तक अलग-अलग राज्यों और शहरों में मदर डेयरी और अमूल दूध के दामों में ₹2 से लेकर ₹9 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन द्वारा 1 सितंबर 2026 से थोक दूध की कीमतों में ₹9 प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जिससे खुला दूध ₹93 से बढ़कर ₹102 प्रति लीटर हो गया है।

1 अक्टूबर 2026 से इंदौर में दूध के दामों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई, जिससे होम डिलीवरी वाला दूध ₹60 से ₹63 और दुकान का दूध ₹63 से ₹65 प्रति लीटर हो गया। कर्नाटक सरकार ने 'नंदिनी' दूध की कीमतों में ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर किया है। जो जल्द ही लागू हो सकता है।

महंगी चीनी ने कम किया मिठास

हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में भी तेज उछाल देखी गई। जहां चीनी का भाव दोगुना हो गया। सितंबर के महीने में देश के कई राज्यों और शहरों में चीनी 70 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका। हालांकि, सरकार की यह दोगुने भाव पर पहुंच गया। हालांकि, सरकार के हस्तक्षेप के बाद इस हल्की नरमी आई है। बावजूद इसके चीनी का ताजा भाव 60 से 65 रुपये प्रति किलो बना हुआ है।

खाने के तेल की कीमतों में लगातार तेजी

रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी बाधाओं और ऊंची ऊर्जा लागत के बीच खाद्य तेल की कीमतें भी दबाव का कारण बनीं। अप्रैल में खाद्य तेल सालाना आधार पर 7 प्रतिशत अधिक थीं। जून में दोनों में 10 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई में खाद्य तेल 11% महंगे थे। घरेलू बजट पर इसका भी असर पड़ता है। खाद्य तेल महंगा होने से रोजाना के भोजन की लागत बढ़ जाती है।

घर में खाना बनाना हुआ महंगा

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रोटी राइस रेट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में वेज थाली की औसत कीमत 26.5 रुपये थी। जबकि, नॉन-वेज थाली की लागत 54.3 रुपये थी। सितंबर 2026 में घर पर बनने वाली वेज थाली का औसत लागत बढ़कर 30.80 रुपये हो गई। वहीं, नॉन-वेज थाली की लागत 59.50 रुपये पर पहुंच गया।

आम आदमी पर क्या असर?

  • खरीदारी में कमी

  • घरेलू खर्च बढ़ना

  • बचत पर असर

  • फिक्स्ड इनकम वालों को परेशानी

  • बढ़ती ब्याज दरें और कर्ज

  • खान-पान और जीवन स्तर में समझौता

ग्रामीण क्षेत्रों में बिगड़े हालात

RBI के सितंबर 2026 के ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों को मापने वाला सूचकांक जनवरी के 100.5 से कमजोर होकर सितंबर में 90.6 पर आ गया। यह सूचकांक रोजगार, इनकम, इकोनॉमी और कीमतों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की बिगड़ती धारणा को बताता है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खाद्य महंगाई काफी अहम है, क्योंकि उनकी कमाई कृषि, मजदूरी और स्थानीय रोजगार पर निर्भर हो सकती है। जब आय स्थिर रहे और खर्च बढ़े, तो बचत कम करने या गैर-जरूरी खरीद टालने की नौबत आती है।

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