Mandatory News Bulletin Proposal: देश में रंगीन टेलीविजन प्रसारण शुरू होने के बाद से दूरदर्शन और आकाशवाणी की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप निजी समाचार चैनलों का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है। स्थिति यह बन गई है कि अनेक बार राष्ट्रीय महत्व और व्यापक जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों की उपेक्षा कर दी जाती है।
ऐसे में सबसे बेहतर उपाय यह होगा कि सभी टीवी चैनलों (निजी तथा दूरदर्शन) के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वे विशेष रूप से तैयार किए गए समाचार बुलेटिन का प्रसारण करें, जिसके तुरंत बाद दिन की किसी महत्वपूर्ण खबर पर विश्लेषणात्मक टिप्पणी प्रसारित की जाए। हिंदी समाचार बुलेटिनों के लिए यह प्रसारण रात्रि 8:30 बजे से 9:00 बजे तक तथा अंग्रेजी समाचार बुलेटिनों के लिए 9:00 बजे से 9:30 बजे तक हो।
हिंदी समाचार बुलेटिन अंग्रेजी समाचार बुलेटिन से पहले प्रसारित हों। यह समझ से परे है कि जिस संस्थान का आधिकारिक हिंदी नाम 'आकाशवाणी' है, उसके लिए 'ऑल इंडिया रेडियो' और 'आकाशवाणी' जैसे दो अलग-अलग नाम क्यों प्रचलित हैं? औचित्य यही है कि ब्रिटिश काल में दिया गया 'ऑल इंडिया रेडियो' नाम अब समाप्त कर दिया जाए और इस स्वायत्त सरकारी प्रसारक को केवल 'आकाशवाणी' के नाम से जाना जाए।
26 जनवरी 1965 को संविधान संशोधन के माध्यम से अंग्रेजी समाचार बुलेटिनों में भी ऑल इंडिया रेडियो को 'आकाशवाणी' तथा प्रेसिडेंट, प्राइम मिनिस्टर और डिफेंस मिनिस्टर को क्रमशः 'राष्ट्रपति', 'प्रधानमंत्री' और 'रक्षा मंत्री' कहा गया था।
जी 20 शिखर सम्मेलन के बाद से सरकारी कार्यक्रमों में भी 'इंडिया' के स्थान पर भारत शब्द का प्रयोग किया जाने लगा है। अब समय आ गया है कि संविधान में संशोधन कर देश का एकमात्र आधिकारिक नाम 'भारत' रखा जाए और देश के दोहरे नाम की व्यवस्था समाप्त कर दी जाए।
यह खेदजनक है कि प्रसार भारती राष्ट्रीय अभिलेखागार ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के एक आदेश के बाद पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के भाषण की ऑडियो रिकॉर्डिंग तो उपलब्ध करा दी, लेकिन प्रसिद्ध हिंदी समाचार वाचक देवकी नंदन पांडे द्वारा पढ़े गए महत्वपूर्ण समाचार बुलेटिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रखी।
देवकी नंदन पांडे इतने प्रतिष्ठित समाचार वाचक थे कि आकाशवाणी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्हें संजय गांधी के निधन का समाचार बुलेटिन पढ़ने के लिए विशेष रूप से बुलाया गया था। वे अशोक बाजपेयी, शिव सागर मिश्र, विनोद कश्यप और रामानुज प्रसाद सिंह जैसे लोकप्रिय हिंदी समाचार वाचकों में शामिल थे। इसी प्रकार आकाशवाणी के पास अंग्रेजी के प्रसिद्ध समाचार वाचक मेल-विल-डीमेलो भी थे।
दूरदर्शन पर भी हिंदी और अंग्रेजी के अत्यंत संतुलित एवं गरिमापूर्ण समाचार वाचक हुआ करते थे, जिन्हें आज भी पुरानी पीढ़ी याद करती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि 12 फरवरी को 'विश्व रेडियो दिवस' मनाया जाता है। तेजी से विकसित होती तकनीक और टेलीविजन नेटवर्क के विस्तार के कारण रेडियो का महत्व अपेक्षाकृत कम हो गया है। फिर भी पुरानी पीढ़ी आज भी 'लहरें', 'सिबाका गीतमाला', 'हवा महल', 'आपकी पसंद', 'आपकी चिड्डी मिली', बाल कार्यक्रम, रात्रिकालीन नाटक तथा अनेक अन्य लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रमों को स्नेहपूर्वक याद करती है।
15 सितंबर 2021 से राज्यसभा टीवी और लोकसभा टीवी का विलय कर 'संसद टीवी' बनाया जाना एक स्वागतयोग्य कदम था, जिससे एक ही उद्देश्य वाले दो चैनलों के संचालन पर होने वाला भारी सार्वजनिक व्यय बचा।
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण उनकी महत्ता के अनुसार किया जा सकता है, जबकि दोनों सदनों की प्रमुख झलकियां प्राइम टाइम में संसद टीवी के साथ-साथ विभिन्न दूरदर्शन चैनलों पर भी दिखाई जा सकती हैं।
लेख- सुभाष चंद्र अग्रवाल के द्वारा