आसिम मुनीर  
नवभारत विशेष

नवभारत विशेष: लादेन और बगदादी जैसा होगा जनरल मुनीर का हाल, अमेरिका-इजराइल का समर्थन, तीसरी बार होगी सर्जिकल स्ट्राइक?

पहलगाम अटैक के बाद भारत ने ये साफ कर दिया था कि आतंक के खिलाफ अब उसकी जंग इसके खात्मे के बाद ही खत्म होगी। ऐसे में अमेरिका के अलावा रूस, इजरायल जैसे देश भी भारत को आतंक का खात्मा करने में मदद करने वाले हैं।

मृणाल पाठक

नवभारत डिजिटल डेस्क: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुस्से और सक्रियता को देखते हुए देश का हर नागरिक इस बात को लेकर उत्सुक है कि आखिर पाक के विरुद्ध भारत की कठोरतम कार्रवाई क्या होगी? प्रधानमंत्री का यह वाक्य कि हमले के दोषियों के खिलाफ हर भारतीय का खून खौल रहा है, जिससे लगता है कि इस बार सर्जिकल स्ट्राइक से अलग कुछ ऐसा होने जा रहा है, जो पाकिस्तान के होश उड़ा देगा।

क्या यह इशारा आतंक के आकाओं के लिए ओसामा और बगदादी जैसी मौत का है? पाकिस्तान की चीन और रूस को जांच में शामिल करने की बात भी इशारा कर रही है कि पाकिस्तान में भी कठोरतम कार्रवाई को लेकर डर अंदर तक घुस गया है।

आतंकवादियों को जब पूरी दुनिया धिक्कार रही है, ठीक तभी पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित किया जाए तथा पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर का ओसामा बिन लादेन जैसा अंत होना चाहिए। यह पाकिस्तान और उसके समर्थकों के लिए खतरे की घंटी है।

इजरायली राजदूत रुवेन अजार ने भी ऐसा ही कुछ कहा है। उन्होंने आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समन्वय की जरूरत जताई है। अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में गुनहगारों की खोज में हम भारत की मदद करेंगे। सीधा-सा इशारा है कि अमेरिका आतंक के खिलाफ लड़ाई में भी अब भारत को मदद देने के लिए तत्पर है। पहलगाम में पर्यटकों को धर्म पूछकर और बेटी, पत्नी, परिवार के सामने निर्दयी तरीके से मारना आतंकवाद की पराकाष्ठा है।

अमेरिका-इजराइल का समर्थन

यही कारण है कि अब पाकिस्तानी आतंकवादियों को खत्म करने के लिए ओसामा बिन लादेन की मौत वाली रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। माइकल रुबिन का यह बयान इसलिए भी कुछ अधिक मायने रखता है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका के रक्षा सचिव के कार्यालय के लिए स्टाफ सलाहकार के रूप में कार्य किया है और वह तालिबान के साथ भी समय बिता चुके हैं। वह अमेरिकी नौसेना तथा मरीन इकाइयों को शिक्षित करने के मास्टर के रूप में भी जाने जाते हैं। अमेरिका के एक समय के खास रणनीतिकार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अब आतंक को समाप्त करने के लिए कि जैसे के साथ तैसा होगा, के लिए ओसामा की मौत वाला रास्ता ही बचा है। भारत ही नहीं ईसाई समुदाय भी इस्लामिक आतंकवाद से काफी परेशान है।

क्या तीसरी सर्जिकल स्ट्राइक होगी?

आशा की जा रही है कि भारत तीसरी सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है। भारत समुद्र के रास्ते किसी प्लान पर काम कर रहा है। पीओके में हमला करके उसे भारत में मिलाएगा या फिर वह पाकिस्तान के बांग्लादेश बंटवारे जैसे किसी काम को अंजाम देगा।

वैसे पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान ऐसा सिरदर्द है, जैसा अफगानिस्तान के सामने तालिबान था। जब यह हमला हुआ था, तब अमेरिका के उपराष्ट्रपति भारत में थे वह जाते-जाते भारत के पक्ष में कई बातें ऐसी कह गए हैं, जो पाकिस्तान की नींद बर्बाद कर देने के लिए काफी हैं। अमेरिकन मदद में हमलावरों और उनके समर्थकों की खुफिया एजेंसियों के माध्यम से जानकारी देना, सैन्य समर्थन खासकर हवाई हमले में मदद, आर्थिक प्रतिबंध लगाना हो सकता है।

लेख- मनोज वार्ष्णेय द्वारा

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